August 23, 2014

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sapne

दादी की सुनाई हुयी वो सपनो की कहानी, चंदा मामा की लोरी वो माँ की ज़ुबानी, बंद आंखें कर सपनो के बादलों को चेहरे पे महसूस करना, अकेली रातों में चाँद से अपनी ख्वाहिश ज़ाहिर करना, जैसे सब कुछ हमसे कहीं छुट गया, जैसे कोई अपना हमसे रूठ गया। निडर अपनी रह पर चले जा…

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udaan

चहकती खिल-खिलती लहरे जब साहिल को चूमती हैं, तब मुस्कुराती हवाएँ भी अपने साज़ गुनगुनाती हैं, बदलते मौसम में ऋतु भी कुछ झूम के कहती हैं, तब सौंधी मिट्टी की खुशबू भी एक रिश्ता कायम करती हैं, गरजते मेघ दिल धड़का जाते हैं, बेगानों को अपना बना जाते हैं, दूरियाँ अब कम सी होती लगती…

Read more उड़ान