2015

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बेटी: Story of A Woman

मैं बेटी बनके आती हूँ बहु बनके जाती हूँ,

मेरी किलकारी बनती है चीख फिर भी चुप रह जाती हूँ,

बेटी से माँ का सफर एक पल में तय कर जाती हूँ,

तुम्हारे नाम को भी मैं अपना बना जाती हूँ|

अपने माँ-बाप को छोड़ तुम्हारे माँ-बाप को अपनाती हूँ,

उनकी सेवा कर अपना फ़र्ज़ निभाती हूँ,

उनके चरणो में अपना स्वर्ग ढूंढने जाती हूँ,

पर फिर भी अंत में, मैं ही बहु कहलाती हूँ|

झूले को छोड़, तेरा चूल्हा मैं जलती हूँ,

ज़मीन पर बिखरी ओढ़नी, अब सर पर लिए जाती हूँ,

सरक जाता है जो मेरा आँचल सर से, तो कुलटा मैं कहलाती हूँ,

अपने अंश को भी तेरा ही नाम दे जाती हूँ|

चूल्हे की जली रोटी पे माँ की सीख का ताना मैं सुनती हूँ,

हर पल अपनी जन्म-जननी को कलंकित भी मैं ही करती हूँ,

सुबकती बिलखती चुप भी खुद हो जाती हूँ,

पलकों में छुपी नींद में अपनी माँ का आँचल ढूंढा करती हूँ|

वो बचपन की हंसी को मैं हर पल खोजा करती हूँ,

अपनी बेटी को हँसते देख मैं अक्सर ये सोचा करती हूँ,

क्या इसकी हंसी भी, हंसी को ढूँढा करेगी?

क्या ये भी मेरी तरह अपनी माँ को ढूढ़ा करेगी?

तेरे बचपन को मैं ना खोने दूंगी,

तेरे साथ मैं ये अन्याय ना होने दूंगी,

तेरी पहचान तू खुद बनाएगी,

इस दुनिया को अपने परिवार के साथ तू ही तो चलाएगी|

तेरा जीवन दुनिया का मार्ग दर्शन होगा,

तेरा आँचल सबकी छाव बना करेगा,

तेरी रोटी सबको भाइयेगी,

तो तेरी हंसी सबको हंसाएगी|

अपने बच्चों को तू खुद ही पढ़ाएगी,

अपनी माँ पर ताने तू अब ना खायेगी,

अब तू आंसू ना बहाएगी,

तू ही बस, अब इस देश के हर एक घर को चलाएगी|


NOTE: You can now hear all my podcasts on my Soundcloud channel.

Background Music Credit: “Crossing the Divide” Kevin MacLeod (incompetech.com), Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0

turning 30

Today’s daily prompt is the word ‘culture’. Though I wrote this blog almost a year ago, I believe this is the most appropriate one for today’s ‘daily prompt’. It shows some unnoticed loopholes of Indian culture. We really need to fix them to make it great in the true sense. Aakuti: What’s up? Prisha: Nothing…

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personal-diary

Hello people, Today I am sharing one secret with you all. A secret which is not a secret anymore. It is my personal diary which I used to maintain when I was a teenager. I know everybody do that… I just wanted to share. 😛 I always used to hide it and keep it in…

Read more My First Diary

मेरी बदसूरती का कारण तू है,
चाँद पे दाग जैसे दिखने वाले कलंक का कारण तू है,
अपनो से रुस्वा होने का कारण भी तो तू है,
अब मेरे हर आँसूं का कारण बस तू है.

लोगो के सवाल का कारण तू है,
मेरे हर जवाब का कारण तू है,
लोगो की हंसी का कारण तू है,
तो मेरी बेबसी का कारण भी तू है.

सबके तानो का कारण तू है,
बन्ने के ना का कारण तू है,
अपनेआप से घरिंडा का कारण तू है,
अकेले सुबकने का कारण तू है.

इस अकेलेपन का कारण तू है,
इस गुस्से का कारण तू है,
सीने में पनपते ज्वालामुखी का कारण तू है,
तो मेरी हर बेचैनी का कारण भी तू  है.

मैं पूछती हूँ तू है कौन?
मेरी परछाई बनी घूमती क्यों है?
दिल के हर दरवाजे को बंद करे बैठी हूँ,
फिर तू मेरे पास क्यों है?

दिल कहता है तुझे अपने से दूर करदु,
इस जहां में ख़ुशी चाहती हूँ, तो तुझे फन्ना करदु,
ये सच है, तो क्यों जगदोजहद होती है मेरे मन में,
दिल और दिमाग की इस लड़ाई में,
मैं क्यों पिसती हूँ हर दफा…

NOTE: You can now hear all my podcasts (audio blog) on my Soundcloud channel.

Liebster-Blog-Award

First experience is always a special one and today, it is a special day for me and my blog. Vaidus World is special to me. It is a place where I can shout and put my views in front of the world without giving a single thought to what people will think about it… A…

Read more Liebster Blog Award