May 29, 2015

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जीने-का-मन-करता-है

कहा फंस गयी हूँ, इन रीति की कड़ियों में बंध गयी हूँ, खुल के जीने का मन करता है, बस कभी-कभी यूँ ही जीने का मन करता है। रात-दिन तो मरती हूँ मैं, फिर भी जीने की ख्वाहिश रखती हूँ मैं, आखिर खुल के जीने का मन करता है, बस कभी-कभी यूँ ही जीने का…

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