June 2015

भंवर-ए-इश्क़

इस कदर आप साँसों में बस जाएंगे, रूह बनकर हमारे रग-रग में उतर जाएंगे, खुशियों का आँचल हमें उतार जाएंगे, हम थे बेखबर की हमारे दिल को इस कदर चुरा […]

mann-ki-mann-se-baat

रात दिन की ये गुफ्तगू , कब खत्म होंगी, ये कमबख्त मौत है की आती नहीं, और ज़िन्दगी फिसलती जा रही है. जैसे फूल मुरझा जाता है, दो दिन खिलके, […]