November 13, 2015

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मेरी बदसूरती का कारण तू है,
चाँद पे दाग जैसे दिखने वाले कलंक का कारण तू है,
अपनो से रुस्वा होने का कारण भी तो तू है,
अब मेरे हर आँसूं का कारण बस तू है.

लोगो के सवाल का कारण तू है,
मेरे हर जवाब का कारण तू है,
लोगो की हंसी का कारण तू है,
तो मेरी बेबसी का कारण भी तू है.

सबके तानो का कारण तू है,
बन्ने के ना का कारण तू है,
अपनेआप से घरिंडा का कारण तू है,
अकेले सुबकने का कारण तू है.

इस अकेलेपन का कारण तू है,
इस गुस्से का कारण तू है,
सीने में पनपते ज्वालामुखी का कारण तू है,
तो मेरी हर बेचैनी का कारण भी तू  है.

मैं पूछती हूँ तू है कौन?
मेरी परछाई बनी घूमती क्यों है?
दिल के हर दरवाजे को बंद करे बैठी हूँ,
फिर तू मेरे पास क्यों है?

दिल कहता है तुझे अपने से दूर करदु,
इस जहां में ख़ुशी चाहती हूँ, तो तुझे फन्ना करदु,
ये सच है, तो क्यों जगदोजहद होती है मेरे मन में,
दिल और दिमाग की इस लड़ाई में,
मैं क्यों पिसती हूँ हर दफा…

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