September 2016

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I have recently published a blog on patriotism. I claimed to be as patriotic as a soldier. I mentioned that my heart cries when a beautiful soul guarding my borders die. I meant every single word of that blog. But I never wanted this to happen. I never wanted to see the torn bodies of my angels protecting the borders. I never wanted to see their blood floating on the land of my country.

I don’t know how to express my current feelings… it’s different… it’s a mix of anger, grief, helplessness, and pain. At one point I want to kill those terrorists while at the other, I just want to hug the families of our martyrs and cry loud. I haven’t met them for once but I feel as if I lost someone very close.

I, as a citizen and someone who feels dead with every death of the soldier do not want any discussions or talks with Pakistan for the solution. We have talked enough… we have done enough of this ‘कड़ी निन्दा’ (strong condemn)… we have given a plenty of tributes… But now, it is ENOUGH!

I demand real solutions. I don’t want to die every single day… I just want justice. We never make the first move in a war but if someone is killing our people repeatedly then why the hell are we quiet? Do we want more sacrifices so that some scriptwriters get the story written for a Bollywood movie? We don’t want movies… we don’t want sacrifices… we don’t want ideals who are dead. We want them to live for us and the whole nation. 🙁

I started this blog with a Hindi poem and poetry expresses the feelings. But it’s strange! Today, I tried pouring my feelings through a poem but I couldn’t. All I could write was the feeling of a soldier. I don’t know how they feel. I could only imagine that feeling. Using that imagination, I tried to touch a corner of their heart that must be having so much of love. I am sure this poem will not depict even 1% of their feelings or love for the country. But currently, all I could do is dedicate this to all the soldiers. You are our true heroes and I love you all for that. Thank you so much for being there! We will miss you… we will miss all the martyrs.

आहुति (Poem For The Martyrs Of Uri Attack)

बदलाव के नाम पर,
देश की प्रगति के नाम पर,
राजनैतिक रणनीतियों का शिकार बन जाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति दे जाता हूँ

धीमे विकास के नाम पर,
प्रौद्योगिकी के कमी के नाम पर,
उन्नति होने का भरोसा करता जाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति दे जाता हूँ|

कभी समझौते के नाम पर,
तो कभी देश के अंश के नाम पर,
दुश्मनो से रिश्ते बनाता जाता हूँ,
अपना सीना छलनी करता जाता हूँ, 
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

अपनी माँ की कोख दाव पर लगता हूँ,
सूनी माँग को बाह्यः कर लाता हूँ,
फिर धरती माँ का सीना अपने लहू से सजता हूँ,
उससे किया वचन निभाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

सरकार की कठपुतली बनता हूँ,
रक्षा मंत्रालय का हुक्म सरमाथे लगता हूँ,
खुद से पहले साथियों की हिफाज़त की करता हूँ,
उनके हिस्से की गोली मैं अक्सर खाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

अपने बच्चों को यतीम बनाता हूँ,
उनके सीने पर अपना वीर च्कर लगा जाता हूँ,
विरासत में चन्द सीके थमा जाता हूँ,
मासूम कंधो पर अपना फ़र्ज़ छोड़ जाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

देश का क़र्ज़ उतार कर जन्नत में जाता हूँ,
ईश्वर से एक और जीवन न्यौच्छारने की अनुमति माँगता हूँ,
खुदा की नाराज़गी सहता हूँ,
ईशु की तकलीफ भी समझता हूँ,
पर वाहे गुरु का नाम लेकर हर जनम में,
जीवन की आहुति अपने देश को देता चाहता हूँ|


Background Music Credit: Pepper’s Theme Kevin MacLeod (incompetech.com); Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License;  http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

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वो पल भी बड़ा मजबूर था, जब तू मुझसे दूर था,
जब तेरे नाम की रट, मेरी सिसकियाँ लगाया करती थी,
जब मेरी परछाई भी, तुझे ना दिखाई पड़ती थी|

ये कमरा सुनता था मेरी चीख की गूँज,
मेरा बिस्तर सोख लेता था आँसूं की हर एक बूँद,
हथेली की लकीरें माथे पर दिखा करती थी,
मेरी फूटी किस्मत के किस्से बयाँ करती थी|

तू नींद में डूब जाता था मुझे बिलखता छोड़,
तेरा काम था मेरे आँसुओं से अनमोल,
दुनिया से किये गए तेरे वादे थे अटल,
पर मुझे दी गयी कसमें,
बन गयी थी बस फसानो भरी ग़ज़ल|

मुझे तनहा छोड़कर तू चला जाता था,
सितारों तले मुझे चाँदनी में जगा जाता था,
कैसे आते थे तुझे परियों के स्वप्न मेरे बिना?
मेरा तो चैन भी तू ही ले जाता था|

मैं तेरी मजबूरी समझूँ ये तेरी इच्छा थी,
अपने काम को बढ़ावा दूं ये तेरी भी तमन्ना थी,
तेरे खुले विचार कभी अपनी पसंद पर नाज़ कराते थे,
तो कभी ये ही हमारे दूर होने का एहसास दे जाते थे|


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Writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
हाँ हाँ तेरी सोच को, शब्दों में ढालना जानता हूँ|
Digital है क्या बला, ये मैं कहाँ जानता हूँ,
Libreoffice पर लिखना, तुझको मैं सीखता हूँ|

मेरे अक्षरों को hashtag का टीका तू लगता है,
Campaign दिखने के लिए हर हत्कन्डे अपनाता है|
Keyword planner से ढूंढ-ढूंढकर शब्द तू लाता है,
फिर organic की दुहाई देकर उन्हें blogs में घुस्वता है|

मेरे शब्दों की आवाज़, soundcloud पर तू डालता है,
मेरी लिखी controversies को फिर YouTube पर दिखता है|
दुनिया के हित में बोलकर sympathy तू ले जाता है,
वाह वाह! मेरे गुस्से का भी पूरा फायदा उठता है|

तेरे tweet को अक्सर एक twist मैं दे जाता हूँ,
खुदके लिखे सही अक्षर को typo error दे जाता हूँ|
Twitter की trending को भी एक घूँट में पी जाता हूँ,
उस hashtag के इर्दगिर्द तेरा blog दुनिया को दिखता हूँ|

रात-रात भर जागकर email तू लिखवाता है,
Newsletter के नाम पर, call-to-action लगवाता है|
Subject line के चार अक्षर से, email तू खुलवाता है,
दुनिया जहां की photo दिखाकर, subscriber तू लाता है|

मेरे लव्ज़ सजाकर तू clients को दिखाता है,
आज मैंने क्या लिखा है ये फिर उनको पढता है|
Inbound के नाम पर तू audience को लाता है,
फिर छोटू सा form दिखा कर उसे तू भरवाता है|

तेरे designs को अपने हाथों से मैं ही सजाता हूँ,
Photo पर लिखी tagline, google doc पर share कर जाता हूँ|
तेरे campaign के तन पर एक बल मैं दे जाता हूँ,
Senti-dialogue मारकर, उसे प्यार से स्वांर्ता हूँ|

तेरी audience भी चाहती हैं मुझे like, share के माध्यम से,
गुस्सा भी जो दिखती है, तो beep-beep के comment से|
अच्छी लगी जो कविता तो marketer को बधाई देते हैं,
Social media पर लिख कर दो तीन जगह share कर लेते हैं|

शब्दों में छुपे मतलब वो बस यूँ भांप लेते हैं,
की मेरे sarcasm में माँ-बहन को लपेट लेते हैं|
मतलब जो भी हो मेरा, कहाँ तू भी समझता है,
ज़रा से वो चीला दें, तू भी मुझपर ही भड़कता है|

हम ठैरे नादान गलती भी कर जाते हैं,
Typo error से लेकर grammar की ले जाते हैं|
SEO SEM में फरक न बता पाते हैं,
Facebook के analytics को हम कहाँ समझ पाते हैं|

लिखना मुझे आता है, पढ़ाना तुझे आता है,
बोलना मुझे आता है, तो दिखाना तुझे आता है|
हाँ हाँ माना तुझको, मैं ही अक्सर फसांता हूँ,
Audience की गालियां भी मैं ही तुझको खिलाता हूँ|

Writer हूँ मैं writer, थोड़ा सा रैहम करदे,
Frustration होता है भाई, थोड़ा सा consider करले|
पांच हज़ार शब्द सुनने में कम लगते हैं,
रोज़-रोज़ लिखने के लिए फिर thesaurus हम छाना करते हैं|

माफ़ी दो अब हमको भी इस रोज़-रोज़ की चिक-चिक से,
Saturday को बता दिया करो plan क्या है next week से|
जो तुम बोलोगे, माँ कसम मैं कर दूंगा,
गालियां न पड़े इसलिए prooferead भी कर लुंगा|

कहाँ अच्छा लगता है यूँ Facebook पे लडभिडना,
Blog पर लिख कर शिकायत लोगों को ज़ाहिर करना|
तू वो mention है जो साथ-साथ चलता है,
मेरी भावनाओं को तू ही तो retweet करता है|

आखिर writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
अगर जो लड़खड़ा जाऊं, तो तेरे सहारे सम्भालना भी जानता हूँ|


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Music Credit: When The Wind Blows Kevin MacLeod (incompetech.com); Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License; http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

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वो ढलती रातें (Transcription)

जब बंद हो जाती हैं बतियाँ और कलम सैर पर निकलता है,
जब ढल जाती हैं चांदनी और बादलों का पहरा रहता है,
तब जज़्बातों की सिहाई से, ये पल हमारी मोहब्बत की कहानी लिखता है|

जब ये अँधेरी रातें, सन्नाटों की गूँज में हवाओं से बातें करती हैं,
जब पंछी पिंजरा छोड़, घोसलों में दुबक कर सोया करते हैं,
तब मेरे ख्यालों की अंगड़ाई, तेरी रूह को बाहों में भरा करती है|

जब बिस्तर का एक सलवट, मेरी दोहर से ढका करता है,
जब तेरा मुस्कुराता चेहरा, नींद भरी पलकों को न झपकने देता है,
तब तेरा एहसास, मेरे ज़हन को अक्सर जकड़ा करता है|

रातों को जब थकान, नींद की गुज़ारिश करती है,
उगते सूरज की किरणों से, मिलने की खाव्हिश ज़ाहिर करती है,
तब हमारी मोहब्बत की खनक, मेरे कानों में सुनाई देती है|

जब घडी कि टिक-टिक, ढलती रात की कहानी बयान करती है,
जब पल थम जाता है, पर वक़्त को जल्दी होती है,
तब भरे मन से इश्क़ मुस्कुराकर मुझे बोलता है,

“ये किरणे न मुझे रोक पाएंगी,
हमारी कहानी दुनिया चांदनी में गुनगुनाईंगी,
तेरे ख्यालों को छेड़ने में कल फिर आऊंगा,
ये वादा है मेरा, तेरी नींद फिर से चुरा ले जाऊँगा|

Background Audio Credit
Clear Waters Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/


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