September 4, 2016

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Writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
हाँ हाँ तेरी सोच को, शब्दों में ढालना जानता हूँ|
Digital है क्या बला, ये मैं कहाँ जानता हूँ,
Libreoffice पर लिखना, तुझको मैं सीखता हूँ|

मेरे अक्षरों को hashtag का टीका तू लगता है,
Campaign दिखने के लिए हर हत्कन्डे अपनाता है|
Keyword planner से ढूंढ-ढूंढकर शब्द तू लाता है,
फिर organic की दुहाई देकर उन्हें blogs में घुस्वता है|

मेरे शब्दों की आवाज़, soundcloud पर तू डालता है,
मेरी लिखी controversies को फिर YouTube पर दिखता है|
दुनिया के हित में बोलकर sympathy तू ले जाता है,
वाह वाह! मेरे गुस्से का भी पूरा फायदा उठता है|

तेरे tweet को अक्सर एक twist मैं दे जाता हूँ,
खुदके लिखे सही अक्षर को typo error दे जाता हूँ|
Twitter की trending को भी एक घूँट में पी जाता हूँ,
उस hashtag के इर्दगिर्द तेरा blog दुनिया को दिखता हूँ|

रात-रात भर जागकर email तू लिखवाता है,
Newsletter के नाम पर, call-to-action लगवाता है|
Subject line के चार अक्षर से, email तू खुलवाता है,
दुनिया जहां की photo दिखाकर, subscriber तू लाता है|

मेरे लव्ज़ सजाकर तू clients को दिखाता है,
आज मैंने क्या लिखा है ये फिर उनको पढता है|
Inbound के नाम पर तू audience को लाता है,
फिर छोटू सा form दिखा कर उसे तू भरवाता है|

तेरे designs को अपने हाथों से मैं ही सजाता हूँ,
Photo पर लिखी tagline, google doc पर share कर जाता हूँ|
तेरे campaign के तन पर एक बल मैं दे जाता हूँ,
Senti-dialogue मारकर, उसे प्यार से स्वांर्ता हूँ|

तेरी audience भी चाहती हैं मुझे like, share के माध्यम से,
गुस्सा भी जो दिखती है, तो beep-beep के comment से|
अच्छी लगी जो कविता तो marketer को बधाई देते हैं,
Social media पर लिख कर दो तीन जगह share कर लेते हैं|

शब्दों में छुपे मतलब वो बस यूँ भांप लेते हैं,
की मेरे sarcasm में माँ-बहन को लपेट लेते हैं|
मतलब जो भी हो मेरा, कहाँ तू भी समझता है,
ज़रा से वो चीला दें, तू भी मुझपर ही भड़कता है|

हम ठैरे नादान गलती भी कर जाते हैं,
Typo error से लेकर grammar की ले जाते हैं|
SEO SEM में फरक न बता पाते हैं,
Facebook के analytics को हम कहाँ समझ पाते हैं|

लिखना मुझे आता है, पढ़ाना तुझे आता है,
बोलना मुझे आता है, तो दिखाना तुझे आता है|
हाँ हाँ माना तुझको, मैं ही अक्सर फसांता हूँ,
Audience की गालियां भी मैं ही तुझको खिलाता हूँ|

Writer हूँ मैं writer, थोड़ा सा रैहम करदे,
Frustration होता है भाई, थोड़ा सा consider करले|
पांच हज़ार शब्द सुनने में कम लगते हैं,
रोज़-रोज़ लिखने के लिए फिर thesaurus हम छाना करते हैं|

माफ़ी दो अब हमको भी इस रोज़-रोज़ की चिक-चिक से,
Saturday को बता दिया करो plan क्या है next week से|
जो तुम बोलोगे, माँ कसम मैं कर दूंगा,
गालियां न पड़े इसलिए prooferead भी कर लुंगा|

कहाँ अच्छा लगता है यूँ Facebook पे लडभिडना,
Blog पर लिख कर शिकायत लोगों को ज़ाहिर करना|
तू वो mention है जो साथ-साथ चलता है,
मेरी भावनाओं को तू ही तो retweet करता है|

आखिर writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
अगर जो लड़खड़ा जाऊं, तो तेरे सहारे सम्भालना भी जानता हूँ|


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Music Credit: When The Wind Blows Kevin MacLeod (incompetech.com); Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License; http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/