April 14, 2017

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एक छोटा सा संदेश मेरी कविता, ‘उम्मीद का तिरंगा’ पढ़ने वालो के लिए

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प्रतिलेख: उम्मीद का तिरंगा

एक दिन बादल यूँ ही गरजेंगे,
खुशियाँ बनके वो बरसेंगे,
एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब हर बच्चा खिल-खिलायेगा|
लहराते खेतों में जिस दिन,
हर बच्चे का हक़ होगा,
चूले पर रोटी सेख़ती माँ को,
निवाले कम पड़ने का न डर होगा||

उम्मीद से भरी इस दुनिया में,
मैं खाना खोजा करता हूँ|
लहराते तिरंगे में भी मैं,
अक्स, भरे पेट का देखता हूँ||

बहने जब घर से निकलेंगी,
आत्मसम्मान कि चुनरी ओढ़ेंगी,
घूंघट उनका शस्त्र नहीं होगा,
जब हर भाई रक्षक होगा|
आज़ादी की सॉंस खुलकर वो लेंगी,
बेटी हर आँगन में खेलेगी,
जब चीखें हँसी में बदल जाएँगी,
उस दिन लष्मी घर आएगी||

उम्मीद से भरी इस दुनिया में,
मैं आज़ादी खोजा करता हूँ|
लहराते तिरंगे में भी मैं,
बेटी का हक़ ढूँढा करता हूँ||

एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब ज्ञान कोने-कोने में पाया जायेगा,
कलम तलवार बनकर ललकारेगी,
व्यापार से बच्चों को बचा निकलेगी|
घर-घर में शिक्षा का मृदंग बजेगा,
बाल मज़दूरी को वो कुचलेगा,
शिक्षित कल का तब जन्म होगा,
बच्चों को पढ़ाना जब बड़ो का धर्म होगा||

उम्मीद से भरी इस दुनिया में,
मैं शिक्षा खोजा करता हूँ|
लहराते तिरंगे में भी मैं,
शिक्षित कल को देखा करता हूँ||


Background Music Credit: There is Romance Kevin MacLeod (incompetech.com)
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http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/