2018

शोर और गुफ्तगू सब मिट से जाते हैं,
धुंधली पड़ जाती है ज़िंदा तसवीरें,
ख्यालों कि आँधी जब कुछ करवट लेती है,
कवि कि ज़िन्दगी तब कुछ पन्नो पर बिखरती है |

वक़्त-ए-रफ़्तार को थामने की गुस्ताख़ी किस्मत ने क्या की,

कि अंजाम के रूबरू होने से पहले ही मंज़िल बदल दी |

वक़्त की गिरफ्त में जब कुछ आँधियां घिर जाती हैं,
महकती गलियां भी जब खिलखिलाते फूलों को याद करती हैं,
शांत सवेरे जब सन्नाटों कि गूँज में बदल जाते हैं,
तब कहीं, दिल टूटने की खनक दबा दी जाती है|

Innocence Lies Here

These days when we hardly find innocence in the world, I met these little creatures. I couldn’t stop myself so captured the innocence from my mobile camera. The blog post, […]