March 16, 2019

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चाहत से भरी इन सर्द रातों में मैं तुझे ढूंढती हूँ,

आँखों से छलकती तेरी शरारती मुस्कान याद-कर हँसती हूँ|

किसी और के दुपट्टे में अपनी जन्नत खोजती हूँ,

तेरी ऊँगली से लिपटे धागे पलकों से गिरे मोती में पिरोती हूँ|

 

चाहत से भरी इन सर्द रातों में मैं तुझे ढूंढती हूँ… बस तुझे ढूंढती हूँ…