Shayari

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यदि आपको यह शायरी पसंद आयी है तो मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको मेरी कविता, ‘मेरी माँ’ भी बहुत पसंद आएगी| यहाँ क्लिक करिये और सुनिया मेरी अब तक कि सबसे अच्छी कविता ‘मेरी माँ’|

चाहत से भरी इन सर्द रातों में मैं तुझे ढूंढती हूँ,

आँखों से छलकती तेरी शरारती मुस्कान याद-कर हँसती हूँ|

किसी और के दुपट्टे में अपनी जन्नत खोजती हूँ,

तेरी ऊँगली से लिपटे धागे पलकों से गिरे मोती में पिरोती हूँ|

 

चाहत से भरी इन सर्द रातों में मैं तुझे ढूंढती हूँ… बस तुझे ढूंढती हूँ…

शोर और गुफ्तगू सब मिट से जाते हैं,
धुंधली पड़ जाती है ज़िंदा तसवीरें,
ख्यालों कि आँधी जब कुछ करवट लेती है,
कवि कि ज़िन्दगी तब कुछ पन्नो पर बिखरती है |

वक़्त की गिरफ्त में जब कुछ आँधियां घिर जाती हैं,
महकती गलियां भी जब खिलखिलाते फूलों को याद करती हैं,
शांत सवेरे जब सन्नाटों कि गूँज में बदल जाते हैं,
तब कहीं, दिल टूटने की खनक दबा दी जाती है|

ऐ दिल! कुछ पल हमसे भी रूबरू हुआ करो,

बेचैन घड़ियों में साथ दिया करो,

तेरी बदमाश धड़कनें गुदगुदी किया करती हैं,

मेरे चंचल मन को सपने दिखाया करती हैं|

Inspired from The Daily Post