Hindi kavitayein

jazbaat

Yun to rukhsati ki humne ijazat maang li, Diwangi ki intihaan ki hadd baandh di, Muskurate labon ki salwaton ko jaane kaise, Unhone badalte mausam ki ghata maan li. Yeh shor […]

दुल्हन

सेज पर बैठी एक दुल्हन, पिया का इंतज़ार कर रही थी, अब आयेगा पिया यह सोचकर, मन ही मन मुस्कुरा रही थी, आँखें झुकी मन में प्यार, पलके झुकाए कर […]

sab-yaad-ata-hai

वो मुड़कर हमें देखना, वो हंसी का एक झोंका, वो हमें छेड़ देना, फिर प्यार से मना लेना, सब याद आता है, होठों पे मुस्कान दे जाता है. वो तुम्हारी […]

सोच के लव्ज़

कहते हैं उन्हें हमसे गिला नहीं, कहते है वो बेवफा नहीं, वफ़ा गिला क्या चीज़ है हमें क्या पता, हम तो बस आंसूं पीतें हैं पर ये उन्हें पता नहीं. […]

naari

आज फिर लिखती हूँ, आज फिर कलम को अपनी दास्ताँ सुनती हूँ, दुनिया कहती है मैं किसी काम की नहीं, मैं  तो उनके इशारों की पुतली हूँ वही, फिर भी […]

bikhre-pal

प्यार का इज़हार ज़रा मुश्किल था, उसपर तेरा इकरार जैसे नामुमकिन था, किया जो तुने इकरार लगा कोई सपना था, क्यूँ दिखाया मुझे सपना जब मेरा दिल ही तोडना था. […]