mann-ki-mann-se-baat

रात दिन की ये गुफ्तगू , कब खत्म होंगी, ये कमबख्त मौत है की आती नहीं, और ज़िन्दगी फिसलती जा रही है. जैसे फूल मुरझा जाता है, दो दिन खिलके, […]

जीने-का-मन-करता-है

कहा फंस गयी हूँ, इन रीति की कड़ियों में बंध गयी हूँ, खुल के जीने का मन करता है, बस कभी-कभी यूँ ही जीने का मन करता है। रात-दिन तो […]

proud-to-be-a-non-voter

Delhi Election! Yeah, right. This blog is on Delhi Elections. As most of us are posting on Social Media and blogs about Delhi elections, I would also like to share […]