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She had a date today. Yeah, a blind one at that. However, Priya’s heart and mind were not aligned. She felt excited for a moment and then suddenly sadness engulfed her. It was her mother Manju, and one of her friends, who had set this date for her. While she frantically rummaged through the heaps…

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एक छोटा सा संदेश मेरी कविता, ‘उम्मीद का तिरंगा’ पढ़ने वालो के लिए

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प्रतिलेख: उम्मीद का तिरंगा

एक दिन बादल यूँ ही गरजेंगे,
खुशियाँ बनके वो बरसेंगे,
एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब हर बच्चा खिल-खिलायेगा|
लहराते खेतों में जिस दिन,
हर बच्चे का हक़ होगा,
चूले पर रोटी सेख़ती माँ को,
निवाले कम पड़ने का न डर होगा||

उम्मीद से भरी इस दुनिया में,
मैं खाना खोजा करता हूँ|
लहराते तिरंगे में भी मैं,
अक्स, भरे पेट का देखता हूँ||

बहने जब घर से निकलेंगी,
आत्मसम्मान कि चुनरी ओढ़ेंगी,
घूंघट उनका शस्त्र नहीं होगा,
जब हर भाई रक्षक होगा|
आज़ादी की सॉंस खुलकर वो लेंगी,
बेटी हर आँगन में खेलेगी,
जब चीखें हँसी में बदल जाएँगी,
उस दिन लष्मी घर आएगी||

उम्मीद से भरी इस दुनिया में,
मैं आज़ादी खोजा करता हूँ|
लहराते तिरंगे में भी मैं,
बेटी का हक़ ढूँढा करता हूँ||

एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब ज्ञान कोने-कोने में पाया जायेगा,
कलम तलवार बनकर ललकारेगी,
व्यापार से बच्चों को बचा निकलेगी|
घर-घर में शिक्षा का मृदंग बजेगा,
बाल मज़दूरी को वो कुचलेगा,
शिक्षित कल का तब जन्म होगा,
बच्चों को पढ़ाना जब बड़ो का धर्म होगा||

उम्मीद से भरी इस दुनिया में,
मैं शिक्षा खोजा करता हूँ|
लहराते तिरंगे में भी मैं,
शिक्षित कल को देखा करता हूँ||


Background Music Credit: There is Romance Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

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