Shayari

आप कहते हैं मैं लिखा करूँ,
विचारों को चंद पन्नो पर बिखेरा करूँ,
पर ये जो चीख मुझे रोज़ सुनाई देती है,
भावनाओं को नम सा कर देती है,
दिल को एड़ी से कुचला करती है,
फिर व्यंग का रस घोलकर,
स्याही का दर्द सन्नाटों में बयाँ करती है|

तक़दीर ने तो बस कदरदान कि मुस्कुराहट माँगी थी,
उनके अक्स को दिल में पनाह देने कि इजाज़त माँगी थी,
तालियों की गूँज तो सब सुनते हैं महफ़िल में,
हमने तो बस उन पलकों में कुछ जगह माँगी थी|

surgical strike conducted by Indian Army

Transcription of above lines on Surgical Strike एक अँधेरी सुबह उग्रवादियों ने हमें भेंट की थी, एक दिया आज हमने शहीदों के नाम जलाया है, दिए की लौ से जो […]

sher-o-shayari

एक दिया जलाया था कहीं, उम्मीद कि किरण बनाकर, खाक कर दिया उसी दिए ने हमें, अपनी ही लौ में जला कर| रात के अंधेरों में डूब जाने का जी […]