Shayari

तक़दीर ने तो बस कदरदान कि मुस्कुराहट माँगी थी,
उनके अक्स को दिल में पनाह देने कि इजाज़त माँगी थी,
तालियों की गूँज तो सब सुनते हैं महफ़िल में,
हमने तो बस उन पलकों में कुछ जगह माँगी थी|

surgical strike conducted by Indian Army

Transcription of above lines on Surgical Strike

एक अँधेरी सुबह उग्रवादियों ने हमें भेंट की थी,
एक दिया आज हमने शहीदों के नाम जलाया है,
दिए की लौ से जो जले कुछ आतंकी,
तो उस जलन से पडोसी मुल्क क्यों छटपटाया है?


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एक दिया जलाया था कहीं, उम्मीद कि किरण बनाकर, खाक कर दिया उसी दिए ने हमें, अपनी ही लौ में जला कर| रात के अंधेरों में डूब जाने का जी करता है, दिन के उजाले में झूम जाने का जी करता है, जब भी वो मिलते हैं ख़्वाबों में, बस उनके ख्यालों में डूब जाने…

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