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I have recently published a blog on patriotism. I claimed to be as patriotic as a soldier. I mentioned that my heart cries when a beautiful soul guarding my borders die. I meant every single word of that blog. But I never wanted this to happen. I never wanted to see the torn bodies of my angels protecting the borders. I never wanted to see their blood floating on the land of my country.

I don’t know how to express my current feelings… it’s different… it’s a mix of anger, grief, helplessness, and pain. At one point I want to kill those terrorists while at the other, I just want to hug the families of our martyrs and cry loud. I haven’t met them for once but I feel as if I lost someone very close.

I, as a citizen and someone who feels dead with every death of the soldier do not want any discussions or talks with Pakistan for the solution. We have talked enough… we have done enough of this ‘कड़ी निन्दा’ (strong condemn)… we have given a plenty of tributes… But now, it is ENOUGH!

I demand real solutions. I don’t want to die every single day… I just want justice. We never make the first move in a war but if someone is killing our people repeatedly then why the hell are we quiet? Do we want more sacrifices so that some scriptwriters get the story written for a Bollywood movie? We don’t want movies… we don’t want sacrifices… we don’t want ideals who are dead. We want them to live for us and the whole nation. 🙁

I started this blog with a Hindi poem and poetry expresses the feelings. But it’s strange! Today, I tried pouring my feelings through a poem but I couldn’t. All I could write was the feeling of a soldier. I don’t know how they feel. I could only imagine that feeling. Using that imagination, I tried to touch a corner of their heart that must be having so much of love. I am sure this poem will not depict even 1% of their feelings or love for the country. But currently, all I could do is dedicate this to all the soldiers. You are our true heroes and I love you all for that. Thank you so much for being there! We will miss you… we will miss all the martyrs.

आहुति (Poem For The Martyrs Of Uri Attack)

बदलाव के नाम पर,
देश की प्रगति के नाम पर,
राजनैतिक रणनीतियों का शिकार बन जाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति दे जाता हूँ

धीमे विकास के नाम पर,
प्रौद्योगिकी के कमी के नाम पर,
उन्नति होने का भरोसा करता जाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति दे जाता हूँ|

कभी समझौते के नाम पर,
तो कभी देश के अंश के नाम पर,
दुश्मनो से रिश्ते बनाता जाता हूँ,
अपना सीना छलनी करता जाता हूँ, 
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

अपनी माँ की कोख दाव पर लगता हूँ,
सूनी माँग को बाह्यः कर लाता हूँ,
फिर धरती माँ का सीना अपने लहू से सजता हूँ,
उससे किया वचन निभाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

सरकार की कठपुतली बनता हूँ,
रक्षा मंत्रालय का हुक्म सरमाथे लगता हूँ,
खुद से पहले साथियों की हिफाज़त की करता हूँ,
उनके हिस्से की गोली मैं अक्सर खाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

अपने बच्चों को यतीम बनाता हूँ,
उनके सीने पर अपना वीर च्कर लगा जाता हूँ,
विरासत में चन्द सीके थमा जाता हूँ,
मासूम कंधो पर अपना फ़र्ज़ छोड़ जाता हूँ,
हाँ! मैं जीवन की आहुति देता जाता हूँ|

देश का क़र्ज़ उतार कर जन्नत में जाता हूँ,
ईश्वर से एक और जीवन न्यौच्छारने की अनुमति माँगता हूँ,
खुदा की नाराज़गी सहता हूँ,
ईशु की तकलीफ भी समझता हूँ,
पर वाहे गुरु का नाम लेकर हर जनम में,
जीवन की आहुति अपने देश को देता चाहता हूँ|


Background Music Credit: Pepper’s Theme Kevin MacLeod (incompetech.com); Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License;  http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

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वो पल भी बड़ा मजबूर था, जब तू मुझसे दूर था,
जब तेरे नाम की रट, मेरी सिसकियाँ लगाया करती थी,
जब मेरी परछाई भी, तुझे ना दिखाई पड़ती थी|

ये कमरा सुनता था मेरी चीख की गूँज,
मेरा बिस्तर सोख लेता था आँसूं की हर एक बूँद,
हथेली की लकीरें माथे पर दिखा करती थी,
मेरी फूटी किस्मत के किस्से बयाँ करती थी|

तू नींद में डूब जाता था मुझे बिलखता छोड़,
तेरा काम था मेरे आँसुओं से अनमोल,
दुनिया से किये गए तेरे वादे थे अटल,
पर मुझे दी गयी कसमें,
बन गयी थी बस फसानो भरी ग़ज़ल|

मुझे तनहा छोड़कर तू चला जाता था,
सितारों तले मुझे चाँदनी में जगा जाता था,
कैसे आते थे तुझे परियों के स्वप्न मेरे बिना?
मेरा तो चैन भी तू ही ले जाता था|

मैं तेरी मजबूरी समझूँ ये तेरी इच्छा थी,
अपने काम को बढ़ावा दूं ये तेरी भी तमन्ना थी,
तेरे खुले विचार कभी अपनी पसंद पर नाज़ कराते थे,
तो कभी ये ही हमारे दूर होने का एहसास दे जाते थे|


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Writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
हाँ हाँ तेरी सोच को, शब्दों में ढालना जानता हूँ|
Digital है क्या बला, ये मैं कहाँ जानता हूँ,
Libreoffice पर लिखना, तुझको मैं सीखता हूँ|

मेरे अक्षरों को hashtag का टीका तू लगता है,
Campaign दिखने के लिए हर हत्कन्डे अपनाता है|
Keyword planner से ढूंढ-ढूंढकर शब्द तू लाता है,
फिर organic की दुहाई देकर उन्हें blogs में घुस्वता है|

मेरे शब्दों की आवाज़, soundcloud पर तू डालता है,
मेरी लिखी controversies को फिर YouTube पर दिखता है|
दुनिया के हित में बोलकर sympathy तू ले जाता है,
वाह वाह! मेरे गुस्से का भी पूरा फायदा उठता है|

तेरे tweet को अक्सर एक twist मैं दे जाता हूँ,
खुदके लिखे सही अक्षर को typo error दे जाता हूँ|
Twitter की trending को भी एक घूँट में पी जाता हूँ,
उस hashtag के इर्दगिर्द तेरा blog दुनिया को दिखता हूँ|

रात-रात भर जागकर email तू लिखवाता है,
Newsletter के नाम पर, call-to-action लगवाता है|
Subject line के चार अक्षर से, email तू खुलवाता है,
दुनिया जहां की photo दिखाकर, subscriber तू लाता है|

मेरे लव्ज़ सजाकर तू clients को दिखाता है,
आज मैंने क्या लिखा है ये फिर उनको पढता है|
Inbound के नाम पर तू audience को लाता है,
फिर छोटू सा form दिखा कर उसे तू भरवाता है|

तेरे designs को अपने हाथों से मैं ही सजाता हूँ,
Photo पर लिखी tagline, google doc पर share कर जाता हूँ|
तेरे campaign के तन पर एक बल मैं दे जाता हूँ,
Senti-dialogue मारकर, उसे प्यार से स्वांर्ता हूँ|

तेरी audience भी चाहती हैं मुझे like, share के माध्यम से,
गुस्सा भी जो दिखती है, तो beep-beep के comment से|
अच्छी लगी जो कविता तो marketer को बधाई देते हैं,
Social media पर लिख कर दो तीन जगह share कर लेते हैं|

शब्दों में छुपे मतलब वो बस यूँ भांप लेते हैं,
की मेरे sarcasm में माँ-बहन को लपेट लेते हैं|
मतलब जो भी हो मेरा, कहाँ तू भी समझता है,
ज़रा से वो चीला दें, तू भी मुझपर ही भड़कता है|

हम ठैरे नादान गलती भी कर जाते हैं,
Typo error से लेकर grammar की ले जाते हैं|
SEO SEM में फरक न बता पाते हैं,
Facebook के analytics को हम कहाँ समझ पाते हैं|

लिखना मुझे आता है, पढ़ाना तुझे आता है,
बोलना मुझे आता है, तो दिखाना तुझे आता है|
हाँ हाँ माना तुझको, मैं ही अक्सर फसांता हूँ,
Audience की गालियां भी मैं ही तुझको खिलाता हूँ|

Writer हूँ मैं writer, थोड़ा सा रैहम करदे,
Frustration होता है भाई, थोड़ा सा consider करले|
पांच हज़ार शब्द सुनने में कम लगते हैं,
रोज़-रोज़ लिखने के लिए फिर thesaurus हम छाना करते हैं|

माफ़ी दो अब हमको भी इस रोज़-रोज़ की चिक-चिक से,
Saturday को बता दिया करो plan क्या है next week से|
जो तुम बोलोगे, माँ कसम मैं कर दूंगा,
गालियां न पड़े इसलिए prooferead भी कर लुंगा|

कहाँ अच्छा लगता है यूँ Facebook पे लडभिडना,
Blog पर लिख कर शिकायत लोगों को ज़ाहिर करना|
तू वो mention है जो साथ-साथ चलता है,
मेरी भावनाओं को तू ही तो retweet करता है|

आखिर writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
अगर जो लड़खड़ा जाऊं, तो तेरे सहारे सम्भालना भी जानता हूँ|


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Music Credit: When The Wind Blows Kevin MacLeod (incompetech.com); Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License; http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

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वो ढलती रातें (Transcription)

जब बंद हो जाती हैं बतियाँ और कलम सैर पर निकलता है,
जब ढल जाती हैं चांदनी और बादलों का पहरा रहता है,
तब जज़्बातों की सिहाई से, ये पल हमारी मोहब्बत की कहानी लिखता है|

जब ये अँधेरी रातें, सन्नाटों की गूँज में हवाओं से बातें करती हैं,
जब पंछी पिंजरा छोड़, घोसलों में दुबक कर सोया करते हैं,
तब मेरे ख्यालों की अंगड़ाई, तेरी रूह को बाहों में भरा करती है|

जब बिस्तर का एक सलवट, मेरी दोहर से ढका करता है,
जब तेरा मुस्कुराता चेहरा, नींद भरी पलकों को न झपकने देता है,
तब तेरा एहसास, मेरे ज़हन को अक्सर जकड़ा करता है|

रातों को जब थकान, नींद की गुज़ारिश करती है,
उगते सूरज की किरणों से, मिलने की खाव्हिश ज़ाहिर करती है,
तब हमारी मोहब्बत की खनक, मेरे कानों में सुनाई देती है|

जब घडी कि टिक-टिक, ढलती रात की कहानी बयान करती है,
जब पल थम जाता है, पर वक़्त को जल्दी होती है,
तब भरे मन से इश्क़ मुस्कुराकर मुझे बोलता है,

“ये किरणे न मुझे रोक पाएंगी,
हमारी कहानी दुनिया चांदनी में गुनगुनाईंगी,
तेरे ख्यालों को छेड़ने में कल फिर आऊंगा,
ये वादा है मेरा, तेरी नींद फिर से चुरा ले जाऊँगा|

Background Audio Credit
Clear Waters Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/


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‘खोज’: A Search Of Love (Transcription)

कभी इस भीड़ में तो कभी खोयी सड़कों में,
भटकती गलियों में, सुनसान नगरियों में,
तुझको ढूँढ़ने की कोशिश करती हूँ,
थक कर, हार कर अक्सर बैठ जाया करती हूँ|

हर चेहरे में तुझे ढूँढा करती हूँ,
वो आँखें जो मुझे बुलाती हैं,
उन्हें अक्सर खोजा करती हूँ,
लोगों के बीच कठपुतली सी ठुमकती हूँ,
तुझे पाने की लालसा में हर वक़्त ज़िन्दगी से झुझा करती हूँ|

अपने अस्तित्व को डाव पर रख कर नाचा करती हूँ,
खुद से ज़्यादा अपनी इस खोज को महत्व दिया करती हूँ,
सज-सवरकर तुझे रिझाने की कोशिश किया करती हूँ,
पर वो कोई और था ये कहकर खुदको मना लिया करती हूँ|

दुनिया से औरतों के हक़ के लिए लड़ने वाली मैं,
खुदको तेरे सामने छोटा बना दिया करती हूँ,
बेख़ौफ़ आवाज़ को भी अक्सर दबा दिया करती हूँ,
तेरे ना मिले प्यार के भरोसे अपना तमाशा बना दिया करती हूँ|

मोहब्बत एक एहसास है जिससे जीना चाहती हूँ,
तेरे मकान को घर मैं बनाना चाहती हूँ,
फड़-फाड़ती हूँ इस पिंजरे से निकलने के लिए,
अब अपने घर में मैं जाना चाहती हूँ|

इश्क़, मोहब्बत, प्यार बस कुछ लव्ज़ लगते हैं,
एक तरफ़ा मोहब्बत को ये हवा दिया करते हैं,
गर तुझे मुझसे मोहब्बत है,
तो क्यों मुझे तू तड़पाता है?
गर तू मुझे चाहता है,
तो क्यों मेरा तमाशा बनाता है?

तू पत्थर है तो अब टकरा एक परबत से,
मेरी चाहत को कमज़ोरी समझने वाले,
अब आकर मिल मेरे इरादों से,
सहमकर छुपकर रोने वाली प्रेमिका नहीं हूँ मैं,
तेरे मकान को घर बनने वाली गृहणी हूँ मैं|


NOTE:  Along with ‘खोज’, you can now hear all audio blogs on my Soundcloud and YouTube channels.

Music Credit: Immersed Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

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The Story of An Ignorant Small Town Girl (Transcription)

Today, I wish to share a true story… a story of a small town girl. Please don’t ask me her name or who is ‘her’ in this story. I want you to figure out. 🙂

She was a graduation student in one of the small towns of India. It was her last year in college. She was studying commerce and trust me, neither her grades were too cool to discuss, nor was her college. She was proud of none. But you know what? Her academic scores never stopped her dreaming. She had her own fantasy world. Whenever she wanted to fly she just used to pick her pen and a diary. Yes, her diary was the only true friend who knew every single thing about her. But her feelings were not easy to understand. Even her diary had to struggle hard. You know why? Because this bubbly girl for this outside world was a big time introvert about her feelings. She didn’t even share her feelings with her only friend, her diary. Although she used to give her hints through her 4 liners. 🙂

She was doing graduation in commerce but she was hardly interested in it. She just followed her parents, family, friends and close ones’ decision like any other Indian child. Though she has no regrets about it now. When she was in school, her textbooks were full of her own hindi four liners, commonly known as ‘sher’ in Hindi.

She knew she was not a poet. She just loved pouring her feelings over a piece of paper. She was quite clear that after her graduation she will be doing MBA and then a nice 9 to 6 job in an MNC. Her life looked so simple to her. Although it was not 🙂

She was always attracted towards creative things. But as many Indians believe creativity can be a hobby but not a profession, she was not different from anyone. Her life was like a boat which had two oars to row it. Right side was her ideal plan for a career and left side was her creative world which wanted her to take a left turn. So, she took a small move towards her left and while she was doing it she didn’t even realise that it was her first step towards her creative profession.

She came across a blogging platform. WordPress was not popular those days. Internet was new to Indians. Infact, she found herself fortunate that her father brought a personal computer for her and her brother. But as her brother was studying in some other city, she was the queen of her own small little world at home. It was ‘her’ PC. 😀

While surfing the internet, she came across RediffiLand.com (now Rediff blog) which was a blogging platform of Rediff. She read a couple of poems and blogs on this platform and instantly fell in love with it. She immediately signed up and started reading blogs. But then that special day arrived… when she broke her silence and started interacting with people across the globe through her blog. 12th March, 2007… this day changed her life.

As she was a shy girl, she had no courage to share her poems written in her diary. But she shared one of her creations. Along with her graduation, she was also a student of Arena Multimedia, an institute that provided education in graphic designing and animation. So, she shared one of the graphics that she had created. And then what next? People started sharing their thoughts about her creation. A bunch of strangers started appreciating her. It was these unknown people who pushed her to speak.

She was introduced to a new world which was professional and creative too. After all, first love is an addiction… either you lose it completely or you stay with it your whole life. And she chose to spend her life with this first love of writing.

As a good Indian ignorant small town girl, she joined MBA. She wanted to join Mass communication for masters but you know what, most of the times we choose the easy way and sometimes your close ones influence you to do so. Rediff changed its interface and she could hardly relate with it. She lost interest in RediffiLand. She tried hard to stick to that platform… so hard that she created three accounts… one after the other but could never used to it.

She started working after MBA and came across a profession called content developer. She loved the idea of becoming a professional content writer. She left her full time job in a nice company and started as a freelance writer. While she was working as a writer she again found her love which was lost. She started blogging on WordPress.

And now, after exactly 9 years she is sharing her story on her blog. Yes! It is my story. Vaidus World was born 9 years ago. I have no words to explain how I am feeling about these butterflies that are tickling my stomach when I look back. It is just awesome… This journey was not a fairy tale… it was surely a roller coaster ride and I totally loved it.

Thank you for reading and appreciating my blogs and poems. My audience is the sole reason for the existence of Vaidus World and this amazing journey of 9 years. I will try to keep it as innocent as it was on 12th March, 2007. I hope my blogs entertained you and will try my best to continue this roller coaster ride with you all.

Cheers! 🙂


Note: You can now hear all our audio blogs on our Soundcloud and YouTube channel.

Background Music Credit: Bensound