‘झूठे’, a poem written for those who are madly in love but don’t get it in return. Hope you like it! 🙂

चाहत से भरी इन सर्द रातों में मैं तुझे ढूंढती हूँ,

आँखों से छलकती तेरी शरारती मुस्कान याद-कर हँसती हूँ|

किसी और के दुपट्टे में अपनी जन्नत खोजती हूँ,

तेरी ऊँगली से लिपटे धागे पलकों से गिरे मोती में पिरोती हूँ|

 

चाहत से भरी इन सर्द रातों में मैं तुझे ढूंढती हूँ… बस तुझे ढूंढती हूँ…