Shayari

वक़्त में नुक्स निकालने के लिए माहिर थे वो,
खता हमारी इबादत के पैमाने में डालते थे वो,
हमारी रातें यूँ ही भेंट कर देते थे वो,
फिर भी दुनिया के लिए हमारे हमसफ़र थे वो|

तिनका-तिनका करके विश्वास बनाया था,
तेरे जाने से पहले, न होने का एहसास बनाया था|

तन्हाई से मुलाकात यूँ ही नहीं हुआ करती,
वक़्त लगता है अपनों को आज़माने में|

मोहब्बत नामुमकिन तो नहीं बस सब्र की मुहताज है,
इस उदास बेचैनी को तो बस उनकी आहट का इंतिज़ार है|

खामोश अल्फ़ाज़ों को सुनने कि ताकत हम में कहाँ,
ये खता तो अक्सर चुलबुली धड़कनें करती हैं|