Shayari

ऐ दिल! कुछ पल हमसे भी रूबरू हुआ करो,

बेचैन घड़ियों में साथ दिया करो,

तेरी बदमाश धड़कनें गुदगुदी किया करती हैं,

मेरे चंचल मन को सपने दिखाया करती हैं|

Inspired from The Daily Post

दीवानों कि बस्ती में एक पगली का पहरा था,
खुदा के बंदों पर उसका विश्वास भी तो गहरा था,
बेनक़ाब मुस्कुराती धूप सी खिलती थी वो,
अपनी ही सुध में बेखौफ घूमती थी वो,
कहती थी दुनिया नहीं है मनचले परवानो की,
ये जहाँ तो है खुदा के कुछ अफ़सानो की|

जब इबादतों कि ताकत कहर बनकर गिरती है,
रक्त में घुलकर पसीने कि महक देती है,
तब किस्मत कि परियाँ भी घुटने टेक देती हैं|

वक़्त में नुक्स निकालने के लिए माहिर थे वो,
खता हमारी इबादत के पैमाने में डालते थे वो,
हमारी रातें यूँ ही भेंट कर देते थे वो,
फिर भी दुनिया के लिए हमारे हमसफ़र थे वो|