poetry

शोर और गुफ्तगू सब मिट से जाते हैं,
धुंधली पड़ जाती है ज़िंदा तसवीरें,
ख्यालों कि आँधी जब कुछ करवट लेती है,
कवि कि ज़िन्दगी तब कुछ पन्नो पर बिखरती है |

तलाश Hindi Poem

यूँ ही तेरा हँस देना, फिर अचानक कुछ रूठ जाना, मेरी खिल्ली उड़ाना, फिर पीछे पड़कर मना लेना, हाथ थामने कि तुझसे ज़िद्द करना, एक नासमझ से हठ करना, गुस्सा होकर मेरा सो जाना, हथेली कि गर्माहट माथे पर महसूस करना |   तू प्यार है किसी और का, तेरी दोस्ती है मेरी, तेरी ज़िद्द…

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Transcription: ‘सच जलता है’

वक़्त कि नाराज़गी हँसती है मुझपर,
शरारती नज़रों से छल करती है अक्सर,
सचाई को नज़रअंदाज़ यूँ ही कर देती है वो,
‘पगली कहकर’, सच का साथ छोड़ देती है वो|

लड़ती-झगड़ती हूँ मैं उसकी इस आदत से,
हठ भी करती हूँ झूठ की दीवारों से,
हार मैं माना करती नहीं,
पर हाँ, थक जाती हूँ इस ज़िद्दी सफर में|

चलते-चलते रुक जाती हूँ झूठ के पथ पर,
फिर साँस गहरी लेती हूँ सच की ज़मीन पर,
खड़ी तो हो जाती हूँ झूठ को झेलने के लिए,
पर चलती हूँ मैं, धीमी गति से फिर अक्सर|

इन रास्तों में झूठ छूट जाते हैं पीछे,
कुछ पल हँसकर वो भी हार जाते हैं सच से,
वक़्त लगता है सच को परवान चढ़ने के लिए,
सच अक्सर जलता है हीरा बनने के लिए|


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Background Music Credit: There is Romance Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

जीवन

यह जीवन की विडम्बना है, अंत को खोजना जैसे उसकी लालसा है, हर पल अंत को पुकारा करती है, सामने होने पर झुठलाया करती है| जल्दी में रहा वो करती है, दौड़ में अव्वल आती है, तेज़ी रफ़्तार में उसके रहती है, अंत को छूकर भी पछताती है| पीछे जैसे कुछ छूट गया हो, वक़्त…

Read more जीवन की विडम्बना

दीवानों कि बस्ती में एक पगली का पहरा था,
खुदा के बंदों पर उसका विश्वास भी तो गहरा था,
बेनक़ाब मुस्कुराती धूप सी खिलती थी वो,
अपनी ही सुध में बेखौफ घूमती थी वो,
कहती थी दुनिया नहीं है मनचले परवानो की,
ये जहाँ तो है खुदा के कुछ अफ़सानो की|