poetry

दीवानों कि बस्ती में एक पगली का पहरा था,
खुदा के बंदों पर उसका विश्वास भी तो गहरा था,
बेनक़ाब मुस्कुराती धूप सी खिलती थी वो,
अपनी ही सुध में बेखौफ घूमती थी वो,
कहती थी दुनिया नहीं है मनचले परवानो की,
ये जहाँ तो है खुदा के कुछ अफ़सानो की|

fairytale

You can not see me, I may not find you, You are searching for me and I’m within you, Let’s go on a date today, let’s take a flight, We don’t need the passport to have a fairytale ride. 😀

Hindi transcription: ‘इसी पल लौट जा’

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा,
मुझपर रोज़ तरस खाने वाले,
ज़र्रा भर तकलीफ तो दे जा|

साथ देने का वादा करने वाले,
एक बार में सारे वादे तोड़ जा,
हर वक़्त मुझे चोट देने वाले,
एक पल चुनकर मुझे मौत तो दे जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

सच की कसम खाने वाले,
कुछ कड़वे झूठ तो बोल जा,
दबी सोच कि निंदा करने वाले,
कुछ बेख़ौफ़ बोल भी सुन जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

बेचैन रातें देने वाले,
एक चाँदनी रात हमसे ले जा,
अकेला छोड़के जाने वाले,
इन यादों को भी अब तू ले जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

जवाब ... तेरे सवालों का!

कुछ वक़्त पहले मैंने एक कविता लिखी थी, ‘आगमन… कुछ सवालों का!’, जिसमें कुछ सवाल उठे थे| यह कविता उन्हीं सवालों का जवाब है| उम्मीद करती हूँ कि आपको यह जवाब पसंद आएंगे| तेरे सवालों से बेहाल सी हूँ मैं, किसी छुपी छवि से अनजान सी हूँ मैं, मेरे जवाब तेरी सोच से परे हैं, मेरा…

Read more जवाब… तेरे सवालों का!

Today, I am sharing a YouTube video of Iqbal Ashhar Ji with the title ‘उर्दू है मेरा नाम’.

I’m quite active on social media and today while I was surfing Twitter, I found Rana Safvi Ji. She pinned one of her tweets and it looked interesting to me. It was her blog post, My name Is Urdu and I am not a Muslim. Now you know why I opened it. 🙂 The title in itself is so interesting and true… something that I strongly believe in.

You must read this blog. It will open the pores of your brain and will give you strong facts and reasons to love Urdu just as a beautiful language. It has nothing to do with any religion and it’s just a ‘pure beauty’. 🙂

Thank you, Rana Safvi Ji for sharing it. Just trying to spread a word about the beauty of this language. 🙂