Kavita

शोर और गुफ्तगू सब मिट से जाते हैं,
धुंधली पड़ जाती है ज़िंदा तसवीरें,
ख्यालों कि आँधी जब कुछ करवट लेती है,
कवि कि ज़िन्दगी तब कुछ पन्नो पर बिखरती है |

ऐ दिल! कुछ पल हमसे भी रूबरू हुआ करो,

बेचैन घड़ियों में साथ दिया करो,

तेरी बदमाश धड़कनें गुदगुदी किया करती हैं,

मेरे चंचल मन को सपने दिखाया करती हैं|

Inspired from The Daily Post

Hindi transcription: ‘इसी पल लौट जा’

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा,
मुझपर रोज़ तरस खाने वाले,
ज़र्रा भर तकलीफ तो दे जा|

साथ देने का वादा करने वाले,
एक बार में सारे वादे तोड़ जा,
हर वक़्त मुझे चोट देने वाले,
एक पल चुनकर मुझे मौत तो दे जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

सच की कसम खाने वाले,
कुछ कड़वे झूठ तो बोल जा,
दबी सोच कि निंदा करने वाले,
कुछ बेख़ौफ़ बोल भी सुन जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

बेचैन रातें देने वाले,
एक चाँदनी रात हमसे ले जा,
अकेला छोड़के जाने वाले,
इन यादों को भी अब तू ले जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…