poem

आगमन... कुछ सवालों का!

उम्मीदें तुम्हारी खुलकर बयाँ करो, नई ज़िन्दगी के पट को खोला करो, सफर साथ तय करना है हमें, हर कदम साथ चलना है हमें| मन की छवि आँखों में दिखने दो, अपनी तमन्नाओं को ज़रा पँख तो लगने दो, आओ आज दो पल साथ चलकर देख लें, यादों के सफर का आगमन तो कर लें| तेरी…

Read more आगमन… कुछ सवालों का!

तक़दीर ने तो बस कदरदान कि मुस्कुराहट माँगी थी,
उनके अक्स को दिल में पनाह देने कि इजाज़त माँगी थी,
तालियों की गूँज तो सब सुनते हैं महफ़िल में,
हमने तो बस उन पलकों में कुछ जगह माँगी थी|

emotional chaotic diffusion

The power of those deep dreamy eyes, Makes my intellect die, My efforts are to say a ‘hi’, Your smile turns it to a ‘sigh’. Confusion… confusion… confusion… What an emotional diffusion! I hide my love with a mask, Carrying it like a daily task, Your friendly hugs and a cute little smile, Fills my…

Read more Emotional Diffusion!

Transcription of ‘वक़्त के उस ओर’

उम्र काटी है मैंने किसी की राह तकते,

एक अनदेखा चहरा दूर खड़ा देखता है मुझे एक टक से,

करीब जाने से बोझल हो जाता है वो,

दूर खड़े फिर क्यों झलक दिखता है वो.

अँधेरी रातों में किरण सा लगता है वो,

मुस्कुराते खिल-खिलते मुझे देखता है वो,

शरारती नज़रें पलकों तले कुछ कह जाती हैं,

कान्हा सी मुस्कान मुझे राधा क्यों बना जाती हैं?

इतने पास है वो, फिर भी करीब नहीं,

नज़रों से छूकर भी छूता नहीं,

हाथ बढ़ता है जो थामने के लिए,

फिर खुद ही क्यों झटक देता है वो?

दुनिया उससे ढूढ़ती है मेरे लिए,

और वो है की रोज़ मुझे कहता है मैं बन हूँ तेरे लिए,

काले धागे की दीवार खड़ी है हमारे बीच,

लाल धुंध लेती है मुझे उससे खिंच,

उसके दूर होने की खनक सुनाई देती है मेरे कदमो तले,

तो क्या मंगलसूत्र, सिन्दूर, और पायल नहीं हैं हमारे बीच?

क्या सुहाग की ये निशानियाँ सवांरती हैं हमारा जीवन,

क्या येही इंतज़ार चाहता था मेरा मन?

लोग कहते हैं कहाँ छुपा है वो कठोर,

मेरे मन से पूछो, वो सामने है बस वक़्त के उस ओर.


Background Music Credit: incompetech

kashmakash

झुकी नज़रें यूँ उठीं, क़यामत ने भी तौबा की, टपके जो उनकी पलकों से आंसूं, खुदा ने भी उन्हें थामने की गुस्ताखी ना की. रातों में पलके भीगा करती हैं, उन्हें याद करके आंसुओं में डूबा करती हैं, कभी बीते पल मुस्कुराहट दे जाते हैं लबों पर, तो कभी आंसूं के रूप में बह जाया…

Read more कश्मकश

भंवर-ए-इश्क़

इस कदर आप साँसों में बस जाएंगे, रूह बनकर हमारे रग-रग में उतर जाएंगे, खुशियों का आँचल हमें उतार जाएंगे, हम थे बेखबर की हमारे दिल को इस कदर चुरा जाएंगे. कुछ अनकहे बोल नज़रों से बयां करना, वो मूड-मुड़कर आपका हमें देखना, ना कुछ कहना, ना कुछ समझना, बस नज़रों का नज़रों से यूँ…

Read more भंवर-ए-इश्क़