poem

भंवर-ए-इश्क़

इस कदर आप साँसों में बस जाएंगे, रूह बनकर हमारे रग-रग में उतर जाएंगे, खुशियों का आँचल हमें उतार जाएंगे, हम थे बेखबर की हमारे दिल को इस कदर चुरा जाएंगे. कुछ अनकहे बोल नज़रों से बयां करना, वो मूड-मुड़कर आपका हमें देखना, ना कुछ कहना, ना कुछ समझना, बस नज़रों का नज़रों से यूँ…

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mann-ki-mann-se-baat

रात दिन की ये गुफ्तगू , कब खत्म होंगी, ये कमबख्त मौत है की आती नहीं, और ज़िन्दगी फिसलती जा रही है. जैसे फूल मुरझा जाता है, दो दिन खिलके, जीना भूल जाता है, तो क्यों न हम जीयें ऐसे, जैसे जिया जाता है मरने के बाद. वक़्त गुज़र गया तो क्या, कि जीना भी…

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जीने-का-मन-करता-है

कहा फंस गयी हूँ, इन रीति की कड़ियों में बंध गयी हूँ, खुल के जीने का मन करता है, बस कभी-कभी यूँ ही जीने का मन करता है। रात-दिन तो मरती हूँ मैं, फिर भी जीने की ख्वाहिश रखती हूँ मैं, आखिर खुल के जीने का मन करता है, बस कभी-कभी यूँ ही जीने का…

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ishq

Is kadar ap saason mein bas jaoge, Rooh ban humare rag-rag mein utar jaoge, Khushiyon ka anchal humein uda jaoge, Hum the bekhabar ki humare hi dil ko is kadar chura jaoge. Kuch ankahe bol nazron se bayan karna, Vo mud-mudkar apka humein dekhna, Na kuch kehna na kuch samjhna, Bas nazron ka nazron se…

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jazbaat

Yun to rukhsati ki humne ijazat maang li, Diwangi ki intihaan ki hadd baandh di, Muskurate labon ki salwaton ko jaane kaise, Unhone badalte mausam ki ghata maan li. Yeh shor ki gunj, yeh sawaalon ki ladi, Yeh naraz nazrein, yeh ankahi boli, Yeh oos ki boondon ko palkon se rok lena, Yeh bistar ko chupke…

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दुल्हन

सेज पर बैठी एक दुल्हन, पिया का इंतज़ार कर रही थी, अब आयेगा पिया यह सोचकर, मन ही मन मुस्कुरा रही थी, आँखें झुकी मन में प्यार, पलके झुकाए कर रही थी पिया का इंतज़ार| इंतज़ार की घडी ख़तम हुयी, उमंग के दरवाज़े खुले, काश यह लम्हा यूँ ही थम जाता, और सिर्फ तुम होते,…

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