poem
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दुल्हन

सेज पर बैठी एक दुल्हन, पिया का इंतज़ार कर रही थी, अब आयेगा पिया यह सोचकर, मन ही मन मुस्कुरा रही थी, आँखें झुकी मन में प्यार, पलके झुकाए कर रही थी पिया का इंतज़ार| इंतज़ार की घडी ख़तम हुयी, उमंग के दरवाज़े खुले, काश यह लम्हा यूँ ही थम जाता, और सिर्फ तुम होते,… Continue reading
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सब याद आता है

वो मुड़कर हमें देखना, वो हंसी का एक झोंका, वो हमें छेड़ देना, फिर प्यार से मना लेना, सब याद आता है, होठों पे मुस्कान दे जाता है. वो तुम्हारी शैतानियां, वो प्यारी सी ठिठोलियाँ, वो हमें गले लगाना, फिर हंसकर भाग जाना, सब याद आता है, होठों पे मुस्कान दे जाता है. वो हाथ… Continue reading
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सोच के कुछ लव्ज़

कहते हैं उन्हें हमसे गिला नहीं, कहते है वो बेवफा नहीं, वफ़ा गिला क्या चीज़ है हमें क्या पता, हम तो बस आंसूं पीतें हैं पर ये उन्हें पता नहीं. ख़ामोशी की ये आवाज़ सुनकर तो देखिये, अन्खाहे लव्जों को बोलकर तो देखिये, ये प्यार की आवाज़ है, दस्तक देकर तो देखिये. आखें जो खुली… Continue reading
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नारी

आज फिर लिखती हूँ, आज फिर कलम को अपनी दास्ताँ सुनती हूँ, दुनिया कहती है मैं किसी काम की नहीं, मैं तो उनके इशारों की पुतली हूँ वही, फिर भी इस दुनिया को जन्म देने वाली जननी हूँ मैं, अपना अंश देकर इस दुनिया में लाने वाली नारी हूँ मैं। आईने को यह बुत अंजना लगता… Continue reading
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बिखरे पल

प्यार का इज़हार ज़रा मुश्किल था, उसपर तेरा इकरार जैसे नामुमकिन था, किया जो तुने इकरार लगा कोई सपना था, क्यूँ दिखाया मुझे सपना जब मेरा दिल ही तोडना था. दिल टुटा तो क्या हुआ, टूटने की अवाकाज़ तो उसने भी सुनी होगी, दर्द दिया तो क्या हुआ, आवाज़ तो उसने भी हमें लगायी होगी.… Continue reading
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निर्भया

ज़िन्दगी के लव्जों से अधूरी कहानी लिखती हूँ, अंतर्मन की किरणों से रौशनी करती हूँ, झंझोरा गया है मेरी आत्मा को, फिर भी उठने की जग्दोजेहेद करती हूँ। इस कदर कुचल दिया गया है मुझे, भरी महफ़िल रुसवा किया गया है मुझे, कहने को दामिनी, निर्भया कहते हैं मुझे, पर भय से भयंकर मंजर दिखाया… Continue reading