सोच के कुछ लव्ज़

कहते हैं उन्हें हमसे गिला नहीं,
कहते है वो बेवफा नहीं,
वफ़ा गिला क्या चीज़ है हमें क्या पता,
हम तो बस आंसूं पीतें हैं पर ये उन्हें पता नहीं.

ख़ामोशी की ये आवाज़ सुनकर तो देखिये,
अन्खाहे लव्जों को बोलकर तो देखिये,
ये प्यार की आवाज़ है,
दस्तक देकर तो देखिये.

आखें जो खुली तो तुम्हें ढूढती हैं,
बंद आँखें भी तुम्हे महसूस करती हैं,
वो पल भी एक अजीब सुरूर दे जाता है,
जब तुम्हारा प्यार भी आंसूं बनकर चालक जाता है.

नाराज़गी का वो भी अजीब मंज़र था,
आँखों में तब भी प्यार का समुन्दर था,
पर सूर्य की दो किरण सम्नुदर को सुखा देंगी,
इसका अंदाज़ा हमें कभी भी न था.


मेरी सोच व् कविताओं को आपके सुझाव कि ज़रूरत है| कृपया कुछ पल निकाल कर अपने सुझाव मेरे साथ कॉमेंट के ज़रिये बाटें| मुझे आपका इंतज़ार रहेगा| 🙂

1 Comment

  1. That Rotund Guy!
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    Awesome! check out my poems too!

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