भंवर-ए-इश्क़

भंवर-ए-इश्क़इस कदर आप साँसों में बस जाएंगे,
रूह बनकर हमारे रग-रग में उतर जाएंगे,
खुशियों का आँचल हमें उतार जाएंगे,
हम थे बेखबर की हमारे दिल को इस कदर चुरा जाएंगे.

कुछ अनकहे बोल नज़रों से बयां करना,
वो मूड-मुड़कर आपका हमें देखना,
ना कुछ कहना, ना कुछ समझना,
बस नज़रों का नज़रों से यूँ ही गुफ्तगू करना.

आपका साथ इस कदर हमें पूरा बना देता है,
जैसे साहिल को कोई किनारा दिखा देता हैं,
यूँ तो हम भी कहा करते थे की हमें उनसे मोहब्बत नहीं,
पर इश्क़ का भंवर अकसर इंसान को डुबा देता है.

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