भाग्य-जीवन

हम लड़ते-झगड़ते हैं,
बेसुध दौड़ में भागते हैं,
फिर एक दिन वक़्त कि ठोकर से,
ज़िन्दगी से हार जाते हैं|

अफ़सोस रह जाता है,
कुछ किस्से छोड़ जाता है,
मुस्कुराती यादों में,
अधूरापन घुल जाता है|

शब्द कम पड़ जाते हैं,
विचार नम हो जाते हैं,
नम आँखों से कुछ पल,
आँचल में बिखर जाते हैं|

आवाज़ें बंद हो जाती हैं,
सिसकियों में मिल जाती हैं,
हँसी-ठिठोलियों को एक दिन,
खामोशी दे जाती हैं|

ये जीवन कि एक चाल है,
सुख-दुःख तो एक साथ है,
भ्रम में रखा करती है,
भाग्य को छल से जिताया करती है|


My poems need your attention. Click here to read and share your love/critics. Both are equally important to me. Will be waiting! 🙂

3 Comments


  1. बहुत खूब शब्दों का चयन और विचारों का मेल बहुत खूब ढंग
    से किया है मेम,
    वाकई आप बधाई की पत्र हैं!
    यूँही लिखते रहें!

    Reply

    1. शुक्रिया sir… आपके comments व् प्रोत्साहन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद| 🙂

      Reply

      1. आप सच में बेहतर हैं,सुर और विचारों का संगम बेहतर करना जानते हैं मेम!

        Reply

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.