खता
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उफ़, ये खता (Shayari)

खामोश अल्फ़ाज़ों को सुनने कि ताकत हम में कहाँ, ये खता तो अक्सर चुलबुली धड़कनें करती हैं| Continue reading
‘मुकम्मल साथ पाना कठिन कहाँ होता है, बस ज़र्रे भर पहल की ज़रूरत है |’ — वैदेही सिंह शर्मा

खामोश अल्फ़ाज़ों को सुनने कि ताकत हम में कहाँ, ये खता तो अक्सर चुलबुली धड़कनें करती हैं| Continue reading