Views And Opinions

Hellooooo…. अभी कुछ दिन पहले एक वीडियो में देखा था कि एक लड़की बोल रही थी की हम लड़कियों को हल्के बोलना सिखाया जाता है. अच्छा? फिर मुझे क्यों नहीं सिखाया किसी ने ये? खैर, जाने दो.

By the way, आप लोगों ने वो ‘शेर आया शेर आया’ वाला कहानी सुनी है? सुनी ही होगी बचपन में. पर हम यहाँ इस कहानी की बात क्यों कर रहे हैं. तो ठीक है, तो क्यों न सबसे Hot & Trendy Topic की बात करें. FEMINISM! What say?

अरे, क्या हुआ? येही तो सबसे Hot topic  है यार. जिसे देखो female rights की बात करता रहता है. और तो और हर दूसरे दिन कोई न कोई ‘actress’ किसी न किसी Video में दिखती है अपनी choice बताती हुयी. पर यार एक बात समझ नहीं आई, choice तुम्हारी, पर सुने हम सब लडकिया. हमने कौनसे पाप किये हैं यार, जो अब लड़कियां भी शुरू हो गयी. बख्श दो हमें. बड़ी मुश्किल से कुछ आज़ादी मिली हैं वरना पहले तो चूल्हे पे रोटी पोने के अलावा कुछ आता ही नहीं था. और अब देखो. हम Saarah Hameed Ahmed जैसी Pilot भी है, Barkha Dutt जैसी famous Journalist भी, Kiran Bedi जैसे IPS और Politician भी, तो Chand Kochachar जैसे leading bank (ICICI) की CEO भी. अरे ये छोडो. खुद को देखो. पहले ज़माने में कभी देखा था किसी लड़की को इतना खुलके दुनिया के सामने बोलते हुए, अपने rights के बारे में? तुम भी तो हो. क्या तुम Successful नहीं हो?

uffffff… अभी और भी समझना पड़ेगा. कितने मोटी बुद्धि हो यार. ठीक है तो मैं तुम्हे सिर्फ 5 Reason देती हूँ मैं की क्यों ये so called ‘Feminism’ का पीछा हमें छोड़ देना चाहिए. ठीक है? शुरू करें? Ok.

पहला Reason

अगर हम इतिहास के पन्ने पलटे, तो हमें पता चलेगा की जिस ‘FEMINISM’ के ढोल हम पीटते हैं वो असल में बीसवी सदी में शुरू हुआ था. और उस वक़्त को नाम दिया गया था ‘First-wave Feminism’. उस वक़्त औरतों की वोट करने तक का हक़ नहीं था. पर आज… नज़र घुमाओ सरकार, आपकी बनायीं हुयी सरकार में ही कितनी सारी औरतें इस देश को चला रही हैं…. दूर क्यों जाते हो? Smt. Sheila Dikshit का नाम तो सुना ही होगा. Delhi की CM रही हैं 1998 से 2013 तक. हमने ही चुना है न इन सब को?

दूसरा Reason

हम अक्सर औरतों के sath हो रहे crime के बारें में बात करते हैं. पर क्या कभी किसी ने ये सोचा है, की यही crime आदमी के sath भी हो सकता है? Child Sexual Abuse! ये तीन शब्द आज भी सिर्फ एक बच्ची के लिए ही क्यों use किया जाता हैं? जब ये ही crime एक लड़के के साथ होता है, तो क्यों वो लड़का अपनी माँ या पिता से खुलके बात नहीं कर पता?

अगर आंकड़ों की बात करे तो आज भी 18 साल से काम उम्र के लड़को में, 6 में से 1 लड़का इस हैवानियत का  शिकार होता हैं. पर इनके लिए कितनी लडकिया या FEMINIST खड़ी  होती हैं?

सिर्फ ये ही नहीं. हर Crime, जो एक औरत के साथ होता है वो एक मर्द के साथ भी होता हैं, फिर चाहे वो Rape हो, Domestic Violence, या Child Sexual Abuse . कई बार तो झूठे आरोप तक लगाये जाते हैं दहेज़ उत्पीड़न के.

तीसरा Reason

अक्सर हम Gender Equality की बात करते है, पर example देते हैं औरतों के. क्यों  भई? सिर्फ औरतों को ही उनका हक़ मिलना चाहिए? Female या Male …. बस ये ही दो gender है? Transgender, transsexuals, androgynes …. इन सब का क्या? क्या ये इंसान नहीं? या इन्हे इनका हक़ नहीं मिलने चाहिए?

Gender equality अपने आप में इतना बड़ा term है, लेकिन हम लोगो ने तो सिर्फ इससे औरतो के equality के लिए ही use करने के लिए छोड़ दिया है. अगर औरतों की equality की बात करनी है, तो boss पहले अपनी general knowledge तो ठीक करो.

रही हमारी बात. तो हम अपना हक़ लेने के लिए तुम्हारे कन्धे का इस्तेमाल नहीं करेंगे. जब हम इस देश को चला सकते हैं, यहाँ के हर एक घर को चला सकते हैं, तो अपना हक़ भी ले सकते हैं. तुम अपना सोचो.

चौथा Reason

कितनी बार मैं देखती हूँ इन Feminists को बोलते हुए की वो लोग सिर्फ औरतों के लिए नहीं, सबके हक़ के लिए लड़ते हैं, फिर चाहे वो औरत हो, मर्द हो, कोई छोटा बच्चा या कोई किन्नर. सच्ची? तो अगर ऐसा है, तो तुम Feminist कैसे हुए? Well! Feminist शब्द ‘Fem’ से शुरू होता है जिसका मतलब है, औरत. इसका मतलब Feminist वो हुआ जो औरतों के rights के लिए लड़े. हैं ना? लड़ो ना यार… जी भर के लड़ो, लेकिन confuse क्यों हो boss?

देखो, या तो तुम confuse हो या फिर बहुत ही ‘Chalu Cheetah’, जो contradictory statement तो मारते हो पर डरते भी हो, तुम्हारे खिलाफ बोलने वालो से. So, dear Sir & Madams, simple सी बात है. औरतों के हक़ के लिए लड़ना चाहते हो तो औरतों के लिए ही लड़ो, बाकियों को मत घसीटों. पर याद रहे, हमारे लिए लड़ो तो दिल से लड़ो, क्यूंकि दिमाग से लड़ने वालो को हम दिल से जवाब देना खूब जानते हैं.

पांचवां और आखिरी Reason, पर सबसे important है ये

आपने Feminazi शब्द सुना है? खाक सुना होगा. By God, general knowledge तो बहुत ही weak है आप लोगो की. कोई नहीं, मैं बताती हूँ. Militant जानते हो? Oho! Terrorist तो सुना ही होगा? हर रोज़ तो बात करते हैं हम इस बारे में. बस! Feminazi  भी कुछ ऐसे ही होता है. इन्हे हम Militant या Extreme Feminist भी कहते हैं. हर वो इंसान जो society के एक हिस्से को, मतलब Feminism you know, को extremely highlight करके अपना उल्लू सीधा करना चाहता है, वो होता है Feminazi. पर आप सोच रहे होंगे की ये कैसे हो सकता है?

YouTube देखते हो? Facebook तो होगा ही? अरे, Twitter तो होगा ही बाबा? बस, इन सब जगहों पे ही ये लोग आपको मिलेंगे. जो बार-बार एक ही बात को रट्टू तोते जैसे बोलते जायेंगे, बोलते जायेंगे और आपके दिमाग में ज़हर घोलते जायेंगे. अब अगर आप, एक ही बात बार-बार अलग-अलग Social Media Channels पे सुनेंगे तो थोड़ा बहुत तो दिमाग में रख ही लोगे ना.

तो ये हुए हमारे पांच reasons की क्यों हमें feminism का ढोल पीटना अब बंद कर देना चाहिए. और हाँ एक बात तो बताना भूल ही गयी. ये सब चीज़ें. औरतें भी देखती हैं, मर्द भी और हमारे बच्चे भी. और इसका असर हम सब पर बराबर का ही होता है.

Free की Advice दूँ? खुद को शांति की नींद चाहिए, तो दूर रहो इनसे. वरना शेर सच में आ जायेगा और इतिहास बाहें फैलाके हमारा स्वागत करेगा. सालों पहले चल रही प्रथाएं जिनपर काफी हद तक हम रोक लगाके आगे बढ़ चुके हैं, या बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, वो वापस हमें जकड लेंगी. जब तक हम लड़कियां अपनी आज़ादी को स्वीकार नहीं करेंगी, तब तक कोई हमें आज़ादी दे भी नहीं सकता.

बाकी, आप खुद समझदार हैं.

Script & Narration: Vaidehi Singh

Concept & Ideation: Gaurav Pareek

Credit for Stats: The 1 in 6 Statistics, RAINN and Wikipedia

NOTE: This podcast is created with an objective to spread awareness about Feminazi and ill-practices prevailing in the society in the name of Feminism. It is not created with an objective to hurt anyone’s (individual/group) sentiments.

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