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Transcription of ‘ नटखट सी ज़िन्दगी ‘

ख़ुशी की गुदगुदी देने वाली,
हँसते-हँसते रुलाने वाली,
कल्पनाओं को सपने बनाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

बरसात में मन भिगोने वाली,
हवाओं कि सरसराहट महसूस कराने वाली,
सूर्य कि किरण सी आस जगाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

भावनाओं में बहाने वाली,
गरजते बादल सी बरसने वाली,
दर्द का कहर धरती से दिखाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

ऊँचाई से गिराकर घमंड तोड़ने वाली,
दोस्ती का मरहम लगाकर चुप कराने वाली,
हाथ थामकर भंवर से निकालने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

ख़ुशी कि शुरुआत गम के अंत से करने वाली,
ठोकर पर मार्गदर्शन देने वाली,
सबको हर पल कुछ सिखाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी |


Background Music Credit: There is Romance Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

*Please use earplugs in case you find problem while hearing this video on your mobile phone.

Hindi Transcription:

वो मुझे तोड़ता मरोड़ता है,
और मेरे दम पर चीख-चिल्लाता है,
अब लोकतंत्र की गुहार लगाता है,
पर मुझी को भूल जाता है…

आज़ादी का पाठ पढ़ाता है,
हक़ की दुहाई देता है,
घरों को वो जलाता है,
फिर भी देशभक्त कहलाता है,
अब लोकतंत्र की गुहार लगाता है,
पर मुझी को भूल जाता है…

जाती पर गर्व वो करता है,
पर कुदरत को दूषित करता है,
स्वच्छता का पाठ पढ़ाता है,
सड़को पर थूक कर जाता है,
अब लोकतंत्र की गुहार लगाता है,
पर मुझी को भूल जाता है…

बटवारे की निन्दा करता है,
पर बिछड़ो को दुश्मन कहता है,
एकता का नारा विदेश में लगाता है,
पर देश को राज्य गिनाता है,
अब लोकतंत्र की गुहार लगाता है,
पर मुझी को भूल जाता है…

अन्देखी शक्ति मानता है,
विधि-विधान को जानता है,
धर्म पर मर-मिटने का इछुक है,
इंसानियत को ठुकराता है,
अब लोकतंत्र की गुहार लगाता है,
पर मुझी को भूल जाता है…

अधीनता को ठुकराता है,
खुद की सरकार चुनकर लाता है,
ए मुर्ख,ज़रा नज़रें घुमा,
तेरी सरकार मेरी अधीन है,
मेरी मर्ज़ी की पराधीन है,
मैं लोकतंत्र बनता हूँ,
तभी संविधान कहलाता हूँ|


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Background Music Credit

Heavy Heart Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

Transcription of डोर (Valentine’s Day Special)

वो सर्द हवाओं का मौसम आया है,
घटाओं ने भी गीत गुनगुनाया है,
चांदनी रातों में तेरी छुअन की तपिश ने,
आज फिर एक तूफ़ान सा लाया है|

तूफ़ान की लड़ी के साथ दिन निकले हैं,
पर तेरी मुस्कुराहट गुलाब की महक में बिखरी है,
आज मेरे पँखों ने फिर उड़ान भरी है,
तेरी हँसी के साथ मेरी पायल भी झूमी है|

दीवानो की भरी इस महफ़िल में दिल तुझको याद करता है,
मोहब्बत का पैगाम तुझको देने की फ़रियाद करता है,
पर दुनिया की ज़ंजीरों ने हमको बांध लिया है,
तुझसे दूर न रहने के मेरे फैसले पर फतवाःजारी किया है|

धर्म के रखवालों को कोई ये समझाए,
कि मोहब्बत की ये डोर उन्ही के रब ने बनायी होगी,
उन्ही की इबादत के फूलों से ये डोर सजाई होगी,
उनकी हिस्से की दुआएं हमें लगायी होगी,
तभी तो ये फूलों की डोर इतनी मज़बूत बनायी होगी|


NOTE: This podcast (poem) is created for the audience of Vaidus World on the occasion of Valentine’s day. You can now hear all my podcasts (audio blogs) on my Soundcloud channel.

Audio Credit: “Gymnopedie No. 1” Kevin MacLeod (incompetech.com);  Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0; http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

Image Credit: Pixabay

‘नादान दिल’: Story Of Heart (Transcription in Hindi)

किसी ने दस्तक दी दिल को,

नादान आहट से ही डर गया,

खुला जो दरवाज़ा दिल का,

तो अपने आपको सौंप गया|

बंद दीवारों में ख़ुशी की लहर उठी,

आज़ादी की साँस आज फिर उसने ली,

बोला, आज फिर मोहब्बत करने का मन करता है,

झूम कर फिर इश्क़ बयां करने का मन करता है|

बाहों में झूलते हुए खुद को भुला बैठा,

किसी की आशिकी में अपना वजूद मिटा बैठा,

अपनेआप को सौंप कर उसे अपना मान बैठा,

कल्पना में उसके साथ अपना घर बना बैठा|

पर मेहमान तो आखिर मेहमान होता है,

दो दिन की ख़ुशी बांटकर अपने घर चल देता है,

नादान दिल आज फिर अकेला बैठा है,

दस्तक के इंतज़ार में,

आज फिर किसी मेहमान की राह देख रहा है|


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Background Music Credit: “Gymnopedie No. 1” Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

Image credit: Pixabay

मेरी बदसूरती का कारण तू है,
चाँद पे दाग जैसे दिखने वाले कलंक का कारण तू है,
अपनो से रुस्वा होने का कारण भी तो तू है,
अब मेरे हर आँसूं का कारण बस तू है.

लोगो के सवाल का कारण तू है,
मेरे हर जवाब का कारण तू है,
लोगो की हंसी का कारण तू है,
तो मेरी बेबसी का कारण भी तू है.

सबके तानो का कारण तू है,
बन्ने के ना का कारण तू है,
अपनेआप से घरिंडा का कारण तू है,
अकेले सुबकने का कारण तू है.

इस अकेलेपन का कारण तू है,
इस गुस्से का कारण तू है,
सीने में पनपते ज्वालामुखी का कारण तू है,
तो मेरी हर बेचैनी का कारण भी तू  है.

मैं पूछती हूँ तू है कौन?
मेरी परछाई बनी घूमती क्यों है?
दिल के हर दरवाजे को बंद करे बैठी हूँ,
फिर तू मेरे पास क्यों है?

दिल कहता है तुझे अपने से दूर करदु,
इस जहां में ख़ुशी चाहती हूँ, तो तुझे फन्ना करदु,
ये सच है, तो क्यों जगदोजहद होती है मेरे मन में,
दिल और दिमाग की इस लड़ाई में,
मैं क्यों पिसती हूँ हर दफा…

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