hindi poem

Transcription of ‘ नटखट सी ज़िन्दगी ‘

ख़ुशी की गुदगुदी देने वाली,
हँसते-हँसते रुलाने वाली,
कल्पनाओं को सपने बनाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

बरसात में मन भिगोने वाली,
हवाओं कि सरसराहट महसूस कराने वाली,
सूर्य कि किरण सी आस जगाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

भावनाओं में बहाने वाली,
गरजते बादल सी बरसने वाली,
दर्द का कहर धरती से दिखाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

ऊँचाई से गिराकर घमंड तोड़ने वाली,
दोस्ती का मरहम लगाकर चुप कराने वाली,
हाथ थामकर भंवर से निकालने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी|

ख़ुशी कि शुरुआत गम के अंत से करने वाली,
ठोकर पर मार्गदर्शन देने वाली,
सबको हर पल कुछ सिखाने वाली,
तू ही तो है… नटखट सी ज़िन्दगी |


Background Music Credit: There is Romance Kevin MacLeod (incompetech.com)
Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/

Hindi transcription: ‘इसी पल लौट जा’

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा,
मुझपर रोज़ तरस खाने वाले,
ज़र्रा भर तकलीफ तो दे जा|

साथ देने का वादा करने वाले,
एक बार में सारे वादे तोड़ जा,
हर वक़्त मुझे चोट देने वाले,
एक पल चुनकर मुझे मौत तो दे जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

सच की कसम खाने वाले,
कुछ कड़वे झूठ तो बोल जा,
दबी सोच कि निंदा करने वाले,
कुछ बेख़ौफ़ बोल भी सुन जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

बेचैन रातें देने वाले,
एक चाँदनी रात हमसे ले जा,
अकेला छोड़के जाने वाले,
इन यादों को भी अब तू ले जा|

ऐ, जाने के लिए आने वाले,
बस, इसी पल तू लौट जा…

हँसी-ठिठोली कि लड़ियाँ जब शोर का रूप लेती हैं,
बंद द्वार के पीछे सुख बिखेर देती हैं,
कक्ष के एक कोने में तब हँसी साँस लेती है,
गम के दरवाज़ों को मुस्कान से वो ढक देती है|

जब कला, योग्यता व् गुणों का मोल-भाव किया जाता है तब दहेज़ जन्म लेता है| इसके खिलाफ आवाज़ उठाना हम सबका फ़र्ज़ है| पर क्या हम भेंट कि आड़ में इसे अपने घरों में पनपने तो नहीं दे रहे?

यह कविता ससुराल या लड़कों पर प्र्श्न नहीं उठाएगी| ये प्र्श्न उठा रही है आप और मुझ पर| ये एक दबी हुयी आवाज़ है जो कभी-कभी इस देश के कुछ हिस्सों में सुनाई देती है|


वो फर्क करते हैं हमारी तरक्की पर,
नाज़ करते हैं बुद्धिमत्ता पर,
हमारी कला उन्हें रचनात्मक लगती है,
कल्पनाओं का समुन्दर प्रतीत होती है|

हम उन्हें गुणों का भण्डार लगते हैं,
शायद गर्व करने का तुछ सामान लगते हैं,
कड़ी तपस्या कि अपेक्षा वो हमसे कहाँ करते हैं,
किस्मत को उगते सूरज कि सीढ़ी समझते हैं|

सम्पति से वो हमारा मान करते हैं,
झुमकी कँगनो से अपनापन नापते हैं,
हमारी नज़्मों में सरस्वती ढूंढते हैं,
फिर लक्ष्मी से तुलना कर,
उसे अपमानित कर देते हैं|

ज्ञान से भरपूर साथी कि कामना करते हैं,
पर शिक्षित बहुओं का कहाँ सम्मान करते हैं,
सपनों को कुचलना तो फ़र्ज़ है महिलाओं का,
आखिर कला को छुड़वाना तो हक़ है ससुराल का|

Writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
हाँ हाँ तेरी सोच को, शब्दों में ढालना जानता हूँ|
Digital है क्या बला, ये मैं कहाँ जानता हूँ,
Libreoffice पर लिखना, तुझको मैं सीखता हूँ|

मेरे अक्षरों को hashtag का टीका तू लगता है,
Campaign दिखने के लिए हर हत्कन्डे अपनाता है|
Keyword planner से ढूंढ-ढूंढकर शब्द तू लाता है,
फिर organic की दुहाई देकर उन्हें blogs में घुस्वता है|

मेरे शब्दों की आवाज़, soundcloud पर तू डालता है,
मेरी लिखी controversies को फिर YouTube पर दिखता है|
दुनिया के हित में बोलकर sympathy तू ले जाता है,
वाह वाह! मेरे गुस्से का भी पूरा फायदा उठता है|

तेरे tweet को अक्सर एक twist मैं दे जाता हूँ,
खुदके लिखे सही अक्षर को typo error दे जाता हूँ|
Twitter की trending को भी एक घूँट में पी जाता हूँ,
उस hashtag के इर्दगिर्द तेरा blog दुनिया को दिखता हूँ|

रात-रात भर जागकर email तू लिखवाता है,
Newsletter के नाम पर, call-to-action लगवाता है|
Subject line के चार अक्षर से, email तू खुलवाता है,
दुनिया जहां की photo दिखाकर, subscriber तू लाता है|

मेरे लव्ज़ सजाकर तू clients को दिखाता है,
आज मैंने क्या लिखा है ये फिर उनको पढता है|
Inbound के नाम पर तू audience को लाता है,
फिर छोटू सा form दिखा कर उसे तू भरवाता है|

तेरे designs को अपने हाथों से मैं ही सजाता हूँ,
Photo पर लिखी tagline, google doc पर share कर जाता हूँ|
तेरे campaign के तन पर एक बल मैं दे जाता हूँ,
Senti-dialogue मारकर, उसे प्यार से स्वांर्ता हूँ|

तेरी audience भी चाहती हैं मुझे like, share के माध्यम से,
गुस्सा भी जो दिखती है, तो beep-beep के comment से|
अच्छी लगी जो कविता तो marketer को बधाई देते हैं,
Social media पर लिख कर दो तीन जगह share कर लेते हैं|

शब्दों में छुपे मतलब वो बस यूँ भांप लेते हैं,
की मेरे sarcasm में माँ-बहन को लपेट लेते हैं|
मतलब जो भी हो मेरा, कहाँ तू भी समझता है,
ज़रा से वो चीला दें, तू भी मुझपर ही भड़कता है|

हम ठैरे नादान गलती भी कर जाते हैं,
Typo error से लेकर grammar की ले जाते हैं|
SEO SEM में फरक न बता पाते हैं,
Facebook के analytics को हम कहाँ समझ पाते हैं|

लिखना मुझे आता है, पढ़ाना तुझे आता है,
बोलना मुझे आता है, तो दिखाना तुझे आता है|
हाँ हाँ माना तुझको, मैं ही अक्सर फसांता हूँ,
Audience की गालियां भी मैं ही तुझको खिलाता हूँ|

Writer हूँ मैं writer, थोड़ा सा रैहम करदे,
Frustration होता है भाई, थोड़ा सा consider करले|
पांच हज़ार शब्द सुनने में कम लगते हैं,
रोज़-रोज़ लिखने के लिए फिर thesaurus हम छाना करते हैं|

माफ़ी दो अब हमको भी इस रोज़-रोज़ की चिक-चिक से,
Saturday को बता दिया करो plan क्या है next week से|
जो तुम बोलोगे, माँ कसम मैं कर दूंगा,
गालियां न पड़े इसलिए prooferead भी कर लुंगा|

कहाँ अच्छा लगता है यूँ Facebook पे लडभिडना,
Blog पर लिख कर शिकायत लोगों को ज़ाहिर करना|
तू वो mention है जो साथ-साथ चलता है,
मेरी भावनाओं को तू ही तो retweet करता है|

आखिर writer हूँ मैं writer, लिखना मैं जानता हूँ,
अगर जो लड़खड़ा जाऊं, तो तेरे सहारे सम्भालना भी जानता हूँ|


Now, you can also hear all audio blogs on my Soundcloud and YouTube channels. So, what are you waiting for? Subscribe it now!


Music Credit: When The Wind Blows Kevin MacLeod (incompetech.com); Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License; http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/