hindi poem

तन्हाई से मुलाकात यूँ ही नहीं हुआ करती,
वक़्त लगता है अपनों को आज़माने में|

हँसी-ठिठोली कि लड़ियाँ जब शोर का रूप लेती हैं,
बंद द्वार के पीछे सुख बिखेर देती हैं,
कक्ष के एक कोने में तब हँसी साँस लेती है,
गम के दरवाज़ों को मुस्कान से वो ढक देती है|