hindi kavita

  • सच जलता है!

    सच जलता है!

    Transcription: ‘सच जलता है’ वक़्त कि नाराज़गी हँसती है मुझपर, शरारती नज़रों से छल करती है अक्सर, सचाई को नज़रअंदाज़ यूँ ही कर देती है वो, ‘पगली कहकर’, सच का साथ छोड़ देती है वो| लड़ती-झगड़ती हूँ मैं उसकी इस आदत से, हठ भी करती हूँ झूठ की दीवारों से, हार मैं माना करती नहीं, Continue reading

  • जीवन की विडम्बना

    जीवन की विडम्बना

    यह जीवन की विडम्बना है, अंत को खोजना जैसे उसकी लालसा है, हर पल अंत को पुकारा करती है, सामने होने पर झुठलाया करती है| जल्दी में रहा वो करती है, दौड़ में अव्वल आती है, तेज़ी रफ़्तार में उसके रहती है, अंत को छूकर भी पछताती है| पीछे जैसे कुछ छूट गया हो, वक़्त Continue reading

  • जवाब… तेरे सवालों का!

    जवाब… तेरे सवालों का!

    कुछ वक़्त पहले मैंने एक कविता लिखी थी, ‘आगमन… कुछ सवालों का!’, जिसमें कुछ सवाल उठे थे| यह कविता उन्हीं सवालों का जवाब है| उम्मीद करती हूँ कि आपको यह जवाब पसंद आएंगे| तेरे सवालों से बेहाल सी हूँ मैं, किसी छुपी छवि से अनजान सी हूँ मैं, मेरे जवाब तेरी सोच से परे हैं, मेरा Continue reading

  • हँसी-ठिठोली

    हँसी-ठिठोली

    हँसी-ठिठोली कि लड़ियाँ जब शोर का रूप लेती हैं, बंद द्वार के पीछे सुख बिखेर देती हैं, कक्ष के एक कोने में तब हँसी साँस लेती है, गम के दरवाज़ों को मुस्कान से वो ढक देती है| Continue reading

  • स्याही

    स्याही

    आप कहते हैं मैं लिखा करूँ, विचारों को चंद पन्नो पर बिखेरा करूँ, पर ये जो चीख मुझे रोज़ सुनाई देती है, भावनाओं को नम सा कर देती है, दिल को एड़ी से कुचला करती है, फिर व्यंग का रस घोलकर, स्याही का दर्द सन्नाटों में बयाँ करती है| Continue reading

  • याद

    याद

    लव्ज़ों में बयाँ हो जाता तो क्या बात थी, दर्द सीने में उतर गया था, वो भी एक रात थी| बिस्तर का एक कोना तब भी भीगा था, आँचल ने गम अपने बाहों में भरा था, ओझल तेरा चेहरा दुनिया से हुआ था, मेरी यादों में घर तेरा फिर से बना था| My blogs need Continue reading