sher

हँसी-ठिठोली कि लड़ियाँ जब शोर का रूप लेती हैं,
बंद द्वार के पीछे सुख बिखेर देती हैं,
कक्ष के एक कोने में तब हँसी साँस लेती है,
गम के दरवाज़ों को मुस्कान से वो ढक देती है|

पहली साँस तो बेपरवाह पँछी सी होती है,
हलक-ए-पर तो बस मोहब्बत की बलि चढ़ते हैं|

mann-ki-mann-se-baat

रात दिन की ये गुफ्तगू , कब खत्म होंगी, ये कमबख्त मौत है की आती नहीं, और ज़िन्दगी फिसलती जा रही है. जैसे फूल मुरझा जाता है, दो दिन खिलके, जीना भूल जाता है, तो क्यों न हम जीयें ऐसे, जैसे जिया जाता है मरने के बाद. वक़्त गुज़र गया तो क्या, कि जीना भी…

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sher-o-shayari

एक दिया जलाया था कहीं, उम्मीद कि किरण बनाकर, खाक कर दिया उसी दिए ने हमें, अपनी ही लौ में जला कर| रात के अंधेरों में डूब जाने का जी करता है, दिन के उजाले में झूम जाने का जी करता है, जब भी वो मिलते हैं ख़्वाबों में, बस उनके ख्यालों में डूब जाने…

Read more बस कुछ शायरी