hindi poetry

mann-ki-mann-se-baat

रात दिन की ये गुफ्तगू , कब खत्म होंगी, ये कमबख्त मौत है की आती नहीं, और ज़िन्दगी फिसलती जा रही है. जैसे फूल मुरझा जाता है, दो दिन खिलके, […]

जीने-का-मन-करता-है

कहा फंस गयी हूँ, इन रीति की कड़ियों में बंध गयी हूँ, खुल के जीने का मन करता है, बस कभी-कभी यूँ ही जीने का मन करता है। रात-दिन तो […]

ishq

Is kadar ap saason mein bas jaoge, Rooh ban humare rag-rag mein utar jaoge, Khushiyon ka anchal humein uda jaoge, Hum the bekhabar ki humare hi dil ko is kadar […]

jazbaat

Yun to rukhsati ki humne ijazat maang li, Diwangi ki intihaan ki hadd baandh di, Muskurate labon ki salwaton ko jaane kaise, Unhone badalte mausam ki ghata maan li. Yeh shor […]

दुल्हन

सेज पर बैठी एक दुल्हन, पिया का इंतज़ार कर रही थी, अब आयेगा पिया यह सोचकर, मन ही मन मुस्कुरा रही थी, आँखें झुकी मन में प्यार, पलके झुकाए कर […]

sab-yaad-ata-hai

वो मुड़कर हमें देखना, वो हंसी का एक झोंका, वो हमें छेड़ देना, फिर प्यार से मना लेना, सब याद आता है, होठों पे मुस्कान दे जाता है. वो तुम्हारी […]